तपन निषाद/कैमोर-अपनी अनूठी और आकर्षक शैली के कारण उद्योग नगरी कैमोर का दसहरा प्रदेश ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति अर्जित कर चुका है। यहां एसीसी रामलीला मैदान में रावण के विशालकाय पुतले का निर्माण किया जाता है। विजयादशमी की शाम इस विशालकाय पुतले का दहन रामलीला मंच से भगवान राम द्वारा छोड़े गए अग्निबाण से होता है। अग्निबाण आकाशीय मार्ग से लगभग 200 मीटर की दूरी तय करते हुए रावण के पुतले तक पहुंचता है। अग्निबाण लगते ही रावण का विशाल पुतला एक भयंकर विस्फोट के साथ धू – धू कर जल उठता है। पुतला दहन और उससे पहले लगभग एक घटे तक होने वाली आकर्षक आतिशबाजी का यह मंत्रमुग्ध कर देने वाला नज़ारा बेहद रोमांचक होता है। यह नज़ारा देखने कैमोर और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग रामलीला मैदान पहुंचते है। पिछले साल हुए पुतला दहन के समय लगभग 70 हजार की भीड़ रामलीला मैदान और आसपास मौजूद थी।
इस बार भी लगभग डेढ़ महीने पहले से अनुभवी और कुशल कारीगरों द्वारा रामलीला मैदान में रावण के पुतले का निर्माण शुरू कर दिया गया था। पुतले के निर्माण में परिश्रम और कला के साथ – साथ तकनीक का प्रयोग भी किया जाता है। पुतले के हाथ,पैर, धड़,सर आदि अंग अलग अलग तैयार करके इन्हें असेम्बल किया जाता है। पहले पुतले के पैर खड़े होते है,,फिर क्रेन के माध्यम से पैरों के ऊपर धड़ रखा जाता है। इसके पश्चात गर्दन सहित दस सिरों को भी क्रेन के माध्यम से चढ़ाया जाता है। ढाल और तलवार लिए दोनों भुजाएं भी बाद में लगाई जाती है। पुतला निर्माण की यह प्रक्रिया भी किसी कौतूहल से कम नहीं होती। बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ इस प्रक्रिया को देखने एकत्र होती रहती है। इस बार भी लगभग 80 फुट की ऊंचाई वाला विशाल पुतला तैयार किया गया जा रहा। फिलहाल सर चढ़ाये जाने का कार्य ही शेष है। उम्मीद है कि दहन से दो दिन पहले ही पुतला पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा।
कैमोर में दशहरे के लगभग तीन सप्ताह पहले ही उत्सव का शुभारंभ रामलीला मंचन से हो जाता है। इस बार मैहर गुबरी से आये मानस मंडल द्वारा रामलीला का मंचन किया जा रहा। रामलीला मैदान में ही स्टेडियम से लगा स्थायी दुर्गा मंडप है। चैत्र नवरात्र की बैठकी से पहले ही दुर्गा मंडप की भव्य और आकर्षक साज सज्जा की जाती है। बैठकी के दिन प्रतिष्ठित आचार्यो के मार्गदर्शन में मां शक्ति स्वरूपा सिंह वाहिनी माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है। रामलीला मंचन देखने तथा मातारानी के दर्शन करने यहां रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अष्टमी की संध्या महाआरती का भव्य और विशाल आयोजन होता है।
दशहरा महोत्सव के लिए इस बार भी पूरे रामलीला मैदान को विधुत की रंगीन रोशनियों से सजाया गया है। मैदान में किनारे से सिलसिलेवार स्टाल सजाए गए हैं। सौंदर्य प्रसाधन से लेकर क्रॉकरी,,घर में उपयोग आने वाले बर्तन और भी जाने क्या क्या इन स्टालों में उपलब्ध है। तरह – तरह के देशी विदेशी व्यंजनों के दर्जनों स्टाल हैं वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनी मैदान में विशालकाय आकाशीय झूले,नाव वाला बड़ा झूला,मिकी माउस और इस बार मौत का कुआं भी लोगों के आकर्षण का केंद्र है।
अडानी एसीसी कैमोर प्लांट के मुखिया सुदीप्तो मंडल के मार्गदर्शन में हेड एच आर श्री पाठक एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी व्यवस्था पर नज़र रख रहे।
दशहरा उत्सव को लेकर प्रशासन भी अलर्ट मोड़ पर है। कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक कैमोर पहुंच कर रामलीला मैदान का निरीक्षण कर चुके है। एसडीओपी तथा टी आई कैमोर आशीष शर्मा प्रतिदिन उपस्थित रह कर चाक चौबंद व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे। शाम के समय सड़कों पर भीड़ भाड़ को देखते हुए आगामी आदेश तक शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक नगर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। पुलिस बल के अलावा अडानी सीमेंट के सुरक्षा जवान भी जगह जगह तैनात है। सीसीटीवी कैमरों से भीड़ पर नज़र रखी जा रही।













