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मंत्री-विधायक अपनी व अपने आश्रितों की संपत्ति का ब्यौरा विधानसभा में देंगे

मंत्री-विधायक अपनी व अपने आश्रितों की संपत्ति का ब्यौरा विधानसभा में देंगे
Madhya Pradesh News मध्यप्रदेश विधानसभा में मंत्रियों-विधायकों ने अपनी और अपने आश्रितों की संपत्ति का ब्योरा हर साल विस को देने का संकल्प सर्वसम्मति से पारित कर दिया। भाजपा ने इस दायरे में आईएएस-आईपीएस और दूसरे वर्गों को भी लेने की मांग की। इस पर विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा कि जो लोकतंत्र के अपने आपको स्तंभ बताते हैं, उन्हें भी इस परिधि में लाना चाहिए। विपक्ष ने इसे बिना दांत और नाखून वाला संकल्प बताया।
विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन बुधवार को संसदीय कार्यमंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने प्रदेश के सभी विधायकों व उनके परिवार के आश्रितों की संपत्ति का ब्यौरा हर साल विधानसभा में देने संबंधी संकल्प प्रस्तुत किया।
संकल्प में प्रावधान किया गया है कि मप्र विधानसभा के सभी सदस्य अपनी तथा उनके परिवार के आश्रितों का हर साल 31 मार्च की स्थिति में अपनी आस्तियों व दायित्वों (संपत्ति व देनदारियों) का विवरण 30 जून तक विस प्रमुख सचिव को दे देंगे। इसके आधार पर मप्र विधानसभा की वेबसाइट पर विधायकों व उनके परिवार के आश्रितों की संपत्ति व देनदारियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि आम जनता आरोप लगाती है कि विधायक के पास चुनाव के पहले टूटी साइकिल थी और आज देखो क्या स्थिति है।
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने इसे बिना दांत और नाखून वाला संकल्प बताया।
उन्होंने कहा कि जब तक इसमे दंड का प्रावधान कर कानून का रूप नहीं दिया जाएगा, तब तक इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने कहा कि इसके दायरे में आईएएस-आईपीएस और राज्य सेवा के अधिकारियों को भी शामिल किया जाना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने भी विपक्ष के सदस्यों की बात का समर्थन करते हुए कहा कि ‘हम लोग अपने को बांध रहे हैं। जो दूसरे लोग लोकतंत्र का अपने आपको स्तंभ कहते हैं, उन्हें भी इस दायरे में लाना चाहिए।”
चर्चा का जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि साधिकार समिति ने कानून का रूप देने के पहले दूसरे राज्यों का अध्ययन करने का सुझाव दिया था और तमिलनाडु, कर्नाटक व बिहार के संकल्पों को देखने के बाद कानूनी स्वरूप देने के विचार को टाल दिया गया। डॉ. सिंह ने कहा कि इसके बाद भी सदस्यों के सुझावों पर मुख्यमंत्री कमलनाथ से चर्चा कर उसके अनुरूप फैसला लिया जा सकता है।

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