CBSE Board Exam Dates 2021: पढ़ाई नहीं हुई तो, एग्जाम कैसे देंगे? CBSE बोर्ड एग्जाम के ऐलान के बाद चिंतित दिखे स्टूडेंट्स

कोरोना महामारी ने जो जिंदगियां छीनी हैं, लोगों को बीमार किया है और हर क्षेत्र में जो उथल-पुथल मचाई है, इससे सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में एजुकेशन सेक्टर है। इस साल बोर्ड एग्जाम में बैठने की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के मन में तमाम तरह की आशंकाएं थीं। एग्जाम कैसे होंगे? कब होंगे? ऑनलाइन होंगे या ऑफलाइन? कहीं पूरा सत्र न बेकार चला जाए? कोर्स कंपलीट कैसे होगा? रीविजन का मौका मिलेगा या नहीं?… आखिरकार गुरुवार को सीबीएसई के स्टूडेंट्स को इस तरह के ज्यादातर सवालों के जवाब मिल गए। सीबीएसई ने 4 मई से 10 जून तक 10वीं और 12वीं के बोर्ड एग्जाम कराने का ऐलान किया है।

4 मई से 10 जून तक होंगे बोर्ड एग्जाम
केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने गुरुवार शाम को घोषणा की कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 4 मई से 10 जून तक कक्षा दस और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करेगा और रिजल्द भी 15 जुलाई तक घोषित कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रयोगात्मक परीक्षाएं एक मार्च से होंगी।

डेट शीट आने पर क्या बोले स्टूडेंट
बोर्ड एग्जाम की तारीखें घोषित होने पर स्टूडेंट्स की तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। परीक्षा कार्यक्रम के ऐलान के तुरंत बाद एनबीटी ऑनलाइन ने तमाम स्टूडेंट्स से इसे लेकर उनकी राय जानी। ज्यादातर स्टूडेंट्स ने खुशी जाहिर की कि अब तमाम तरह की आशंकाओं, कयासबाजियों, अटकलों का अंत हो चुका है। थोड़ी देरी से ही सही, लेकिन एग्जाम हो जाएंगे। हालांकि, कुछ स्टूडेंट्स ने यह चिंता जताई कि पढ़ाई पूरी नहीं हुई है, अभी एग्जाम नहीं कराया जाना चाहिए था।

देरी से एग्जाम की वजह से मिलेगा रिवीजन का मौका
ज्यादातर छात्रों ने सीबीएसई की डेटशीट की तारीफ की। आम तौर पर फरवरी और मार्च में होने वाली बोर्ड परीक्षाएं इस बार मई और जून में होने जा रही हैं। छात्रों का कहना है कि इससे उन्हें न सिर्फ कोर्स कंपलीट करने बल्कि रिवीजन का भी मौका मिलेगा। स्कूल बंद थे लिहाजा ऑनलाइन पढ़ाई हुई। ज्यादातर स्कूलों ने बोर्ड एग्जाम की तैयारी के मद्देनजर ऑनलाइन ही प्री-बोर्ड एग्जाम कराए। तमाम स्टूडेंट्स ने कहा कि ऑनलाइन क्लासेज के जरिए उनका कोर्स तकरीबन कंपलीट है। अब वह पूरे जोश और दमखम के साथ बोर्ड परीक्षा में बैठेंगे।

कुछ स्टूडेंट्स और देरी से चाहते थे एग्जाम
ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के स्टूडेंट्स ने कहा कि एग्जाम और देरी से होते तो अच्छा होता। हालांकि, अगर ऐसा होता तो शिक्षा-सत्र भी बुरी तरह प्रभावित होता। वैसे और देरी से एग्जाम के पीछे उनके वाजिब तर्क भी हैं। तकरीबन पूरे साल स्कूल बंद रहे। कोरोना को फैलने से रोकने के लिए देशभर में वर्ष 2020 में स्कूल बंद कर दिए गए थे। कुछ राज्यों में इन्हें 15 अक्टूबर से आंशिक तौर पर खोल दिया गया था। हालांकि, कुछ राज्यों ने संक्रमण के मामलों में वृद्धि के चलते स्कूलों को बंद रखने का फैसला किया है। वर्ष 2020 में बोर्ड परीक्षाएं मार्च के मध्य में स्थगित करनी पड़ी थीं। बाद में इन्हें रद्द कर दिया गया था और परिणाम की घोषणा वैकल्पिक आकलन योजना के आधार पर घोषित की गई थी।

स्कूल बंद रहे, ऑनलाइन क्लासेज की अपनी सीमाएं
ऑनलाइन क्लासेज के जरिए स्कूलों की तरफ से कोशिश जरूर हुई कि बच्चों की पढ़ाई बहुत ज्यादा प्रभावित न हो। लेकिन ऑनलाइन क्लासेज की भी अपनी चुनौतियां हैं। एक तो इसके लिए मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप जरूरी हैं। अगर ये हैं भी तो इंटरनेट की समस्या है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या की वजह से बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई बाधित हुई है। ऐसे छात्रों को अब यह चिंता है कि पढ़ाई तो ठीक से हो नहीं पाई, एग्जाम कैसे देंगे। हालांकि, मई-जून में एग्जाम होने से उन्हें तैयारी के लिए करीब 2 महीने का अतिरिक्त समय जरूर मिला है। हालांकि अच्छी बात यह है कि सीबीएसई पहले ही ऐलान कर चुका है कि इस बार मार्कशीट पर फेल या कंपार्टमेंट नहीं लिखा रहेगा ताकि स्टूडेंट्स पर मानसिक दबाव न रहे।

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