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मध्य प्रदेश के दमोह एग्जिट पोल में भाजपा के जीतने की संभावना

अनुसूचित जनजाति

Damoh मध्यप्रदेश में BJP की एक और सीट बढ़ सकती है। भास्कर एग्जिट पोल में यही निकलकर आ रहा है। दमोह विधानसभा उपचुनाव में BJP के कैंडिडेट राहुल सिंह लोधी जीत सकते हैं। इसके पीछे तीन बड़े फैक्टर हैं। पहला- मध्यप्रदेश में स्पष्ट बहुमत की सरकार का फायदा। दूसरा- गांवों में पार्टी का विरोध नहीं और तीसरा- भाजपा संगठन की चुनाव लड़ने की रणनीति।

पहले फैक्टर को समझना बहुत आसान है कि उपचुनाव की इस सीट को जीतने के लिए मध्यप्रदेश सरकार के कई मंत्रियों ने यहां डेरा डाल दिया था। इसमें मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह सबसे बड़े चेहरे थे। इनसे न केवल कथित दबाव-प्रभाव का मैनेजमेंट बनाने पर काम किया, बल्कि सामाजिक वोटों का जिम्मा भी इन्हीं ने संभाला।

अब दूसरा फैक्टर..! दरअसल, दमोह शहर में कांग्रेस का दलबदलू कार्ड हावी हो रहा था। कोरोना काल में भी पार्टी को विरोध झेलना पड़ रहा था। इस कारण पार्टी ने तुरंत लाइन बदली और पूरी ताकत गांवों पर झोंक दी। वहां ये दोनों ही फैक्टर प्रभावी नहीं थे। इसके लिए मंत्रियों को तैनात किया गया।

BJP के लिए यह सुखद भी है क्योंकि इस बार शहर से ज्यादा वोट गांवों में पड़े हैं। शहर में वोटिंग कम होना भी ‘आक्रोश का वोट कम पड़ना’ उसी के पक्ष में जाते दिख रहा है। गांवों में 64% के मुकाबले शहर में वोटिंग प्रतिशत 53 ही रहा।

तीसरा फैक्टर रणनीति का है। जयंत मलैया जैसे दिग्गज नेता की सीट पर कांग्रेस से आए प्रत्याशी को लड़ाना भी BJP के लिए कम मुश्किल वाला नहीं था। पार्टी ने मलैया को मनाने की कोशिशें जरूर कीं, लेकिन आक्रामक तरीके से। बेटे सिद्धार्थ मलैया को भविष्य के ख्वाब दिखाकर यह भी जता दिया कि आगे उन्हें अच्छे दिन नहीं चाहिए क्या?

पार्टी की दोधारी पॉलिटिक्स से भितरघात का संशय खत्म हो गया। बेटे के भविष्य की खातिर मलैया खुद राहुल सिंह के चुनाव प्रचार पर निकल पड़े तो सबसे ज्यादा विरोध वाले शहर दमोह की कमान सिद्धार्थ को सौंप दी। बीच चुनाव में हुए इस रणनीतिक फैसलों ने एक वक्त आगे बताई जा रही कांग्रेस पिछड़ते दिख रही है। कांग्रेस के प्रत्याशी अजय टंडन ने आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ा, लेकिन उनके पास मजबूत फौज की कमी नजर आई।

45 हजार वोटर्स बदलेंगे समीकरण
दमोह सीट पर 60% वोट ही पड़े। इनमें से 53% ही शहर में। जबकि राहुल सिंह को लेकर शहर में जो विरोध देखा गया, वह वोट में बदलते नहीं दिखा। शहर के करीब 45 हजार वोटर्स ने मतदान ही नहीं किया, इसी ने सभी समीकरण पलट दिए।

भास्कर से साभार