Friday, October 23, 2026
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आतंक का अंत: शहाबुद्दीन ने दो भाइयों को तेजाब से कराया था ‘स्नान’, पिता चंदा बाबू ने आखिरी सांस तक लड़ी थी जंग

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का जन्मदिन से 9 दिन पूर्व निधन हो गया है। तिहाड़ जेल के डीजी ने इस बात की पुष्टि की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शहाबुद्दीन जेल में कोरोना संक्रमित हो गए थे। स्वास्थ्य बिगड़ने पर 20 अप्रैल को उन्हें डीडीयू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।   

एसिड कांड की सजा काट रहे थे मोहम्मद शहाबुद्दीन
16 अगस्त 2004 की बात है, सात-आठ युवकों ने सीवान के राजीव किराना स्टोर से कैश लूट लिया। दुकान में बैठे राजीव ने जब इसका विरोध किया तो युवकों ने राजीव की जमकर पिटाई कर दी। इतने में राजीव का भाई गिरीश बाथरूम से एसिड की बोतल लेकर आया और बदमाशों को डराने लगा, कहा- भागो यहां से नहीं तो मुंह पर एसिड फेंक दूंगा। उस समय सभी युवक डरकर भाग गए। लेकिन कुछ देर बाद वे झुंड में लौटे और जबरदस्ती राजीव, गिरीश व तीसरे भाई सतीश को प्रतापपुर ले गए। वहां ईख के खेत के पास गिरीश और सतीश को पेड़ से बांध दिया। 
शहाबुद्दीन ने कोर्ट लगाकर सुना दिया फैसला
इस बात की जानकारी मिलते ही तत्कालीन सांसद शहाबुद्दीन मौके पर पहुंचे और वहीं कोर्ट लगाकर फैसला सुना दिया कि दोनों भाईयों (गिरीश और सतीश) को एसिड स्नान कराओ। शहाबुद्दीन का फरमान सुनते ही दोनों पर तेजाब डाल दिया गया और राजीव को बंधक बना पिता चंदा बाबू से फिरौती मांगने लगे। 
डीआईजी के हस्तक्षेप के बाद थाने में दर्ज हुआ मामला
तीसरे दिन राजीव किसी तरह बदमाशों के चंगुल से भाग गया और घर पहुंचकर पिता चंदा बाबू को शहाबुद्दीन की पूरी कारस्तानी बताई। चंदा बाबू को धमकी दी गई कि अगर उन्होंने पुलिस को इस कांड की जानकारी दी तो अच्छा नहीं होगा। लेकिन चंदा बाबू बिना किसी खौफ के थाने पहुंच गए और शहाबुद्दीन के खिलाफ शिकायत की। लेकिन उस क्षेत्र में शहाबुद्दीन का इतना खौफ था कि थानेदार के भी हाथ कांपने लगे। उसने चंदा बाबू को समझाया कि इस उम्र में शहाबुद्दीन से पंगा मत लो। लेकिन चंदा बाबू नहीं माने, वे एसपी के पास गए। एसपी नहीं नहीं मिले तो डीआईजी के पास गए। तब जाकर शहाबुद्दीन के खिलाफ केस दर्ज हुआ। 
16 साल बाद मिला इंसाफ
70 की उम्र में चंदा बाबू गवाह बने। कोर्ट में गवाही से तीन दिन पहले चश्मदीद राजीव को गोलियों से भून दिया गया। दिसंबर 2020 को केस लड़ते-लड़ते चंदा बाबू का निधन हो गया, पर शहाबुद्दीन को सजा दिलवा गए।

Anubhav Shukla

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