Monday, November 2, 2026
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Madhya Pradesh: पुजारी नहीं भगवान ही होंगे मंदिर की संपत्ति के मालिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘पुजारी सेवक ही रहेंगे’

नई दिल्ली। मंदिर की संपत्ति (Mandir Property) को लेकर हमेशा विवाद बना रहता है. मंदिर पुजारी और प्रबंधन के लोग मंदिर संपत्ति पर अपने-अपने दावें ठोकते रहते हैं. जिसके बाद स्थिति हमेशा असमंजस की बनी रहती है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मंदिर संपत्ति पर सिर्फ मंदिर के देवता का ही मालिकाना हक रहेगा. पुजारी और प्रबंधन समिति के लोग सिर्फ सेवक ही रहेंगे. साथ ही सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने यह भी आदेश दिया है कि भू राजस्व रेकॉर्ड (land revenue record) से पुजारियों के नाम हटाए जाएं.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए मध्य प्रदेश के एक मंदिर के मामले में यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि देवता ही मंदिर से जुड़ी भूमि के मालिक हैं.

‘पुजारी मंदिर के सेवक हैं’

सुप्रीम कोर्ट में अपने फैसले में ये भी साफ कर दिया है कि पुजारी सिर्फ इन संपत्तियों के रखरखाव के लिए हैं. दरअसल बहुत से मामलों में देखा गया है कि पुजारी ने मंदिर पर अपना मालिकाना हक जताया है. जिसको देखते हुए ही ये बात स्पष्ट की गई है. बता दें कि जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने इस मामले में आयोध्य सहित पहले के कई फैसलों का जिक्र किया है.

‘पुजारी काश्तकार नहीं, सिर्फ रक्षक है’

उन्होंने कहा कि मंदिर की जमीन का पुजारी काश्तकार नहीं, सिर्फ रक्षक है. पुजारी केवल एक किराएदार जैसा है. कोर्ट ने कहा कि मंदिर में जो भी पुजारी होगा, वही वहां देवी देवताओं को भोग लगाएगा. साथ ही मंदिर से संबंधित जमीन पर खेती बारी का काम भी संभालेगा.

रिकॉर्ड में भी पुजारी सेवक के रूप में ही होगा

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह भी कहा कि सभी रेकॉर्ड में पुजारी की स्थिति सेवक के रूप में ही होगी, मालिक के रूप में नहीं होगी. देवता की मान्यता कानूनी व्यक्ति के रूप में विधि सम्मत है, लिहाजा पुजारियों के नाम भू राजस्व रेकॉर्ड से हटाए जाएं. भूस्वामी के तौर उस समुचित कॉलम में देवता का ही नाम ही रहेगा.

Anubhav Shukla

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