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कोरोना से बिजली कंपनी के 74 कर्मचारी व स्वजनों की मौत, अधिकारियों के रवैये से असंतोष

कोरोना का कहर बिजली कंपनी के कर्मचारियों पर भी टूट रहा है। अब तक कोरोना से ऐसे लोगों की मौत हुई हो चुकी है जिनका संबंध पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी सेे है

इंदौर। कोरोना का कहर बिजली कंपनी के कर्मचारियों पर भी टूट रहा है। अब तक कोरोना से ऐसे लोगों की मौत हुई हो चुकी है जिनका संबंध पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी सेे है। मरने वाले या तो बिजली कंपनी के कर्मचारी है या उनके स्वजन। मरने वालों की यह संख्या सिर्फ पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की है। लगातार हो रही मौतों से बिजली कर्मचारियों में असंतोष फट पड़ा है। कर्मचारी यूनियनों ने आरोप लगाया है बिजली कंपनी के ही अधिकारी जिला प्रशासन की टीम में शामिल है। लेकिन वे कंपनी के कर्मचारियों को अस्पताल में बिस्तर या आक्सीजन नहीं दिलवा पा रहे हैं। इसी के चलते ज्यादातर मौतेें हुई है।

बिजली कर्मचारियों ने 74 मृतकों की सूची बुधवार को जारी कर दी। कर्मचारी संंगठनों के अनुसार लगभग 8 से 10 विद्युत कर्मियों की हर दिन मृत्यु हो रही है । अप्रैल तक मौत का शिकार बनेे 74 में से 58 स्वयं विद्युत कर्मी हैं और 16 उनके स्वजन हैं। स्वजन भी दूर के रिश्तेदार नहीं बिल्क पारिवारिक सदस्य है। इनमें बिजलीकर्मी के माता-पिता,भाई, बहन और पुत्र-पुत्री शामिल हैं। सबसे ज्यादा मौते इंदौर में 16 लोगों की हुई है।

 

जबक‍ि उज्जैन में 9, रतलाम में 7,देवास में 6, मंदसौर और धार में 5- 5, खरगोन, खंडवा, आगर,झाबुआ में प्रत्येक में 4, बड़वानी और शाजापुर में 3-3 और बुरहानपुर में 3 मौत हो चुकी हैं। कर्मचारी संगठन नाराजगी जताते हुए आरोप लगा रहे हैं कि इनमें से ज्यादातर कर्मचारियों की मृत्यु की प्रमुख दो वजह है। या तो कंपनी किसी भी अस्पताल में भर्ती नही करवा सकी और उन्हें ऑक्सीजन और आवश्यक दवाए नही मिलने से उनकी मृत्यु हुई है। कुछ लोगों को कंपनी ने जैसे-तैसे अस्पताल में भर्ती तो करवा दिया लेकिन उन्हें या तो ऑक्सीजन बेड नही मिला या फिर रेमडिसीविर इंंजेक्शन नहीं मिल सका। मरने वालों में कुछ विद्युत कर्मियों की उम्र तो महज 25 से 35 साल के बीच की ही थी।

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