
चतुर्थ- क्रमोन्नत वेतनमान के लाभ से महरूम शिक्षकों क़ो हो रहा आर्थिक नुकसानशिक्षक कर रहे विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक का बेसब्री से इंतज़ार
कटनी /मध्य प्रदेश शासन द्वारा 35वर्षों की सेवा पूर्ण कर चुके शिक्षकों क़ो चतुर्थ क्रमोन्नति वेतनमान के लाभ से लाभान्वित करने से जुड़ा आदेश जारी हुए, महीनों का समय गुजर जाने के वावजूद भी पात्र शिक्षकों क़ो अपना हक प्राप्त करने हेतु संघर्ष जैसे अप्रिय दौर से गुजरने के लिये मज़बूर होना पड़ रहा है।
शासन द्वारा जारी आदेश के परिपालन में जिला शिक्षा अधिकारी कटनी द्वारा जिले के समस्त संकुल प्रचार्यों क़ो पत्र लिखकर इक्कीस दिनों के भीतर पात्र शिक्षकों का प्रस्ताव जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा करने का आदेश जारी किया गया था।चूंकि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश की समय सीमा आज समाप्त होते ही शिक्षक गण अब बेसब्री से जिला पदोन्नति समिति की बैठक का इंतज़ार कर रहे हैं । हाला कतिपय संकुल प्राचार्यों द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इस हेतु विगत 10अप्रैल 2026क़ो जारी किये गये आदेश क़ो अहमियत न दिये जाने की खबर भी सुर्खियों में है ।हाला अब देखने वाली बात यह भी होगी कि जिन संकुलों से पात्रता धारी शिक्षकों के प्रस्ताव समय सीमा के भीतर वरिष्ठ कार्यालय में जमा नहीं हुए, उन संकुलों पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा किस तरह की कार्यवाही उनके खिलाफ प्रस्तावित करते हैं !
प्रांतीय प्रवक्ता-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा संघ कुंवर मार्तण्ड सिँह राजपूत ने वर्षों से चतुर्थ क्रमोन्नति वेतनमान के लाभ प्राप्ति की आशा में दिन गिन रहे शिक्षकों का पक्ष जिला शिक्षा अधिकारी कटनी के समक्ष रखकर यथा शीघ्र पात्र शिक्षकों क़ो लाभ प्रदान करने की मांग करते हुए, एक सप्ताह के भीतर जिले में गठित पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित कराकर लाभ सुनिश्चित कराने पर बल दिये हैं।उन्होंने विश्वास जाहिर किये हैं, कि जिला शिक्षा अधिकारी कटनी सहायक शिक्षकों और उच्च श्रेणी शिक्षकों क़ो उनका संवैधानिक हक समय पर प्रदान करने में संकुल प्राचार्यों द्वारा अब्बल दर्जे की बरती जा रही कोताही पर उन्हें अनुशासन का पाठ अवश्य पढ़ाएंगे ।शिक्षक नेता ने स्पष्ट किया कि चतुर्थ क्रमोन्नति का लाभ से जुड़ा आदेश सहायक और उच्च श्रेणी शिक्षकों हेतु मध्य प्रदेश शासन स्तर से ही अत्यंत विलंब से जारी होने से इस संवर्ग के शिक्षक द्वय लंबे समय से अत्यंत आर्थिक नुकसान के दौर से गुजर रहे हैं।अतः अब शिक्षकों के आर्थिक हित से जुड़े इस मामले में और अधिक विलंब करना उनके साथ अन्याय का पर्याय माना जायेगा।उन्होंने जिला प्रशासन से बगैर किसी आंदोलन,ज्ञापन, जैसी अप्रिय कार्यवाही के,यथा शीघ्र पात्र शिक्षकों क़ो लाभान्वित करने की मांग एक बार पुनः दुहराने का प्रयास किये हैं।








