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7 साल बाद ISRO का मिशन नाकाम; प्रक्षेपित नहीं हो पाया सेटेलाइट

7 साल बाद ISRO का मिशन नाकाम; प्रक्षेपित नहीं हो पाया सेटेलाइट
बेंगलुरु.    इसरो ने (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन) ने पहली बार प्राइवेट कंपनियों की मदद से बने सैटेलाइट की लॉन्चिंग की। ये मिशन नाकाम साबित हुआ। ISRO चीफ किरण कुमार ने कहा- नेविगेशन सैटेलाइट को लॉन्च किए जाने वाला स्पेस मिशन फेल रहा। लॉन्चिंग के 90 सेकंड बाद कुछ परेशानी हुई। हम इसका डीटेल्ड एनालिसिस करेंगे। इससे पहले 25 दिसंबर, 2010 को GSLV-F06 लॉन्च किया गया था। इसकी पहली ही स्टेज में दिक्कत आई थी और ये मिशन फेल हो गया था। गुरुवार को श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C 39 रॉकेट की मदद से नेविगेशन सैटेलाइट IRNSS-1H को छोड़ा गया। बता दें कि 24 साल में दूसरी बार पीएसएलवी का मिशन फेल हुआ है। अब तक 40 में से 38 उड़ाने कामयाब रही हैं। क्यों फेल हुआ इसरो का मिशन…
 ISRO चीफ किरण कुमार ने कहा- ”सैटेलाइट को लॉन्च किए जाने वाले स्पेस मिशन में कुछ परेशानी हुई। हम इसका डीटेल्ड एनालिसिस करेंगे। मिशन के किसी स्टेज में बड़ी परेशानी सामने नहीं आई। लॉन्चिंग के 90 सेकंड बाद सिर्फ चौथे स्टेज में दिक्कत आई। हीट शील्ड्स सैटेलाइट से अगल नहीं हो पाईं। सैटेलाइट के ऑर्बिट तक पहुंचने के लिए ऐसा जरूरी होता है।”
 
 24 साल में दूसरी बार फेल हुआ PSLV
– पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) ने पहली उड़ान 20 सितंबर, 1993 को भरी थी, लेकिन ये मिशन नाकाम रहा। इसके बाद 15 अक्टूबर, 1994 को रॉकेट ने स्पेस की दूसरी उड़ान भरी। तब से लेकर अब तक PSLV 40 बार स्पेस मिशन पर जा चुका है। इनमें से 38 कामयाबी मिली। यानी कि 1993 के बाद अब दूसरी बार पीएसएलवी का मिशन फेल हुआ है।     
– बता दें कि PSLV इसरो का सबसे भरोसेमंद रॉकेट लॉन्चर माना जाता है। इसके जरिए फरवरी, 2017 में इसरो ने एक साथ सबसे ज्यादा (104) सैटेलाइट्स लॉन्च करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। गुरुवार से पहले इसका आखिरी मिशन जून, 2017 में हुआ था। 
 प्राइवेट कंपनियों का 25% सहयोग
– इसरो के मुताबिक, पहली बार किसी सैटेलाइट को बनाने में प्राइवेट कंपनियां सीधे तौर पर शामिल हुईं। 1425 KG वजनी IRNSS-1H को बनाने में प्राइवेट कंपनियों का 25% योगदान रहा है।
– पहले सैटेलाइट बनाने में प्राइवेट कंपनियां सिर्फ हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, पार्ट और जरूरी सामान ही मुहैया कराती थीं, लेकिन आईआरएनएसएस-1 एच में प्राइवेट कंपनियों के इंजीनियर और टेक्निकल्स एसेंबलिंग, इलेक्ट्रिकल इंटीग्रेशन, टेस्टिंग आदि काम में शामिल रहे हैं। इसके लिए 6 प्राइवेट कंपनियों का एक ग्रुप बनाया गया था। इन कंपनियों के 70 लोगों को अलग से ट्रेनिंग भी दी गई।
– इसरो सैटेलाइट सेंटर (आइसैक) के डायरेक्टर एम. अन्नादुरै का कहना है कि अगले आईआरएनएसएस-1 आई में करीब 95% काम प्राइवेट कंपनियां करेंगी।
 
प्राइवेट कंपनियों ने 6 महीने प्रोजेक्ट में काम किया
– कंपनियों के ग्रुप की अगुआई अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज कंपनी ने किया। इसके अलावा बेंगलुरु की तीन और मैसूर और हैदराबाद की एक-एक कंपनी इस प्रोजेक्ट में शामिल रहीं। टीम के 70 इंजीनियर और टेक्निकल ने 6 महीने तक काम किया।
– अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज के चेयरमैन कर्नल एसएस शंकर का कहना है कि ये कंपनी के लिए सम्मान की बात है। इस काम में कंपनी के टॉप इंजीनियर शामिल रहे हैं। उन्होंने इसरो के टेक्नोक्रेट्स के गाइडेंस के मुताबिक कंपोनेंट्स की एसेंबलिंग की।

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