
Yogi Adityanath Case: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर 15 साल पुराने एक मामले में मुकदमा नहीं चलेगा। फरवरी 2018 में हाई कोर्ट ने कहा था कि उसे मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इनकार करने का फैसला लेने की प्रक्रिया में कोई प्रक्रियात्मक गलती नहीं मिली. याचिकाकर्ता परवेज परवाज और अन्य ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को आज बड़ी राहत मिल गई। सुप्रीम कोर्ट ने भड़काऊ भाषण देने के आरोप में उन पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
यह मामला 2007 का है। यूपी सरकार ने मई 2017 में इस आधार पर मुकदमे की अनुमति देने से मना कर दिया था कि सबूत नाकाफी हैं। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी फरवरी 2018 में मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी थी। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सीजेआई एनवी रमण, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने आज इस मामले में फैसला सुनाया
सरकार ने दी ये दलील
इससे पहले बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने चीफ जस्टिस एन वी रमन्ना, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सी.टी. रविकुमार की बेंच से कहा कि मामले में कुछ भी नहीं बचा है और सीडी को सीएफएसएल को भेजा गया था, जिसमें पाया गया कि इसमें छेड़छाड़ की गई थी. यह देखते हुए कि याचिका में उठाए गए मुद्दे पर पहले ही हाई कोर्ट विचार कर चुका है, उन्होंने कहा, ‘आप 15 साल बाद अब एक मरे हुए घोड़े की पिटाई नहीं कर सकते क्योंकि वह आदमी आज सीएम है.’
सुप्रीम कोर्ट से लगाई थी गुहार
फरवरी 2018 में, हाई कोर्ट ने कहा था कि उसे मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इनकार करने का फैसला लेने की प्रक्रिया में कोई प्रक्रियात्मक गलती नहीं मिली. याचिकाकर्ता परवेज परवाज और अन्य ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. बेंच ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा कि अगर कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं होती है, तो मंजूरी का सवाल ही कहां है.








