Thursday, October 22, 2026
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एक ऐसा नि:शक्त शिक्षक जो सेवा निवृत्त के बाद भी विद्यार्थियों से अदभुत लगाव रखता है

एक ऐसा नि:शक्त शिक्षक जो सेवा निवृत्त के बाद भी विद्यार्थियों से अदभुत लगाव रखता ह।

कटनी /विगत वर्ष सितंबर 2025 में अपनी 62 वर्ष की अधिवार्षीकीय आयु पूर्ण कर सेवा निवृत्त हुये नि:शक्त शिक्षक मार्तण्ड सिँह राजपूत आज भी शिक्षा विभाग से गहरा नाता जोड़कर चल रहे हैं।शिक्षा विभाग को अपनी 42वर्षों की उत्कृष्ट सेवा देकर सेवा निवृत्त हुये सहायक शिक्षक श्री राजपूत का स्नेह और लगाव आज भी विद्यालयों में अध्ययनरत नवनिहालों के प्रति अदभुतऔर अनुकरणीय है।

सेवा -निवृत्त हो जाने के बाद भी वे जिले के विद्यालयों में पहुंचकर आये दिन बच्चों से संवाद स्थापित कर उनकी छोटी -बड़ी जरूरतों की भरपाई करते नजर आते हैं। अपने गृह ग्राम धनवारा से लगे आस पास के ग्रामीण विद्यालयों में जाकर ये उन छात्रों को गिफ्ट स्वरूप अध्ययन सामग्री भेंट करते देखे गये हैं, जिन बच्चों का उक्त तिथि पर जन्मदिन रहता है। कटनी से अपने गृह ग्राम धनवारा (बड़वारा) जाते समय इन्हें जो भी विद्यालय रास्ते में मिलते हैँ, ये निःसंकोच उन विद्यालयों में जाकर बच्चोंऔर शिक्षकों से संवाद स्थापित कर उनकी कठिनाइयों और शालेय गतिविधियों पर गंभीर चर्चा कर निराकरण हेतु सक्रिय भूमिका में भी देखे गये हैं।

एक भेंट के दौरान उन्होंने बताया कि लगातार लंबे समय तक विद्यालयों से जुड़ाव रहने के कारण उन्हें स्कूली बच्चों से जबरजस्त स्नेह और लगाव हो गया है। यही वजय है, कि ज़ब तक वे दिन में एक बार किसी विद्यालय विशेष में पहुंचकर विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों से संवाद स्थापित कर जरूरतमंद गरीब बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर देते, तब तक उनके मन को शांति नहीं मिलती है ।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने ग्राम के विद्यालय को गोद लेकर उस विद्यालय के सर्वांगीण विकास में अपना भरपूर योगदान की रणनीति बहुत पहले से ही बना चुके हैं। यही कारण है, कि विद्यालय की हर छोटी -बड़ी समस्यायों के निराकरण में वे सदैव तत्पर और उत्सुक नजर आते हैं।

उन्होंने जिले के शिक्षकों से अनुरोध किये हैं, किअध्ययन रत बच्चों को पूरी निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी से अध्ययन-अध्यापन कराने से मन को सकून, सुख और शांति का अनुभव होता है ।इससे शिक्षक का मान- सम्मान विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के बीच सेवा से निवृत्ति होने के बाद भीअनवरत बना रहता है, ऐसा उन्होंने अपना अनुभव शेयर किये हैं ।उन्होंने बच्चों के भविष्य को सजाने और संवारने वाले शिक्षकों को कर्तव्य बोध कराते हुये दो टूक शब्दों में अगाह किये कि शिक्षकों को यदि ईश्वर की कृपा से बच्चों को सँस्कारित करने का सुअवसर मिला है, तो उसका सही सदुपयोग कर उन्हें इस काबिल बनाने का प्रयास सभी शिक्षकों को करना चाहिए,कि बच्चा जीवन में कभी भी पीछे मुड़कर देखने के बजाय आगे ही बढ़ता जावे ।ऐसा करने से शिक्षकों की छवि जीवन पर्यन्त बच्चों के दिल और दिमाक में एक आदर्श गुरूजी के रूप में स्थापित रहती है ।

Anubhav Shukla

Website Developer & Editor with 3 years of experience in regional news reporting and Managing News Website. Mobile: +919425156783 💬 Chat on WhatsApp