Friday, October 30, 2026
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17 सितंबर तक मेहरबान रहेंगे सूर्य देव, मेष-मिथुन-सिंह समेत इन राशियों वालों को फायदा

धर्म डेस्क। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्यदेव को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है। सूर्य देव हर महीने अपनी राशि बदलते हैं। जिस दिन सूर्यदेव अपनी राशि बदलते हैं उसे संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। इस समय सूर्यदेव सिंह राशि में विराजमान हैं और 17 सितंबर के दिन राशि बदलकर सूर्यदेव कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। सिंह राशि में रहने के दौरान कुछ राशि के लोगों पर सूर्य़देव की कृपा बनी हुई है और इन्हें लाभ मिल रहा है। यहां हम इन्हीं राशियों के बारे में बता रहे हैं, जिन पर सूर्यदेव 17 सितंबर तक मेहरबान रहे।

मेष राशि: मेष राशि के लोगों पर सूर्य देव की कृपा बनी हुई है। इन लोगों का पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। और संतान की ओर से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। दांपत्य जीवन भी सुखी रहेगा और परिवार के सदस्यों का सहयोग प्राप्त होगा। धन लाभ भी होगा।

मिथुन राशि: व्यवसाय में लाभ के योग बनेंगे। भाई-बहन से मदद मिल सकती है। मान- सम्मान और पद- प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जीवनसाथी के साथ समय व्यतीत करने का अवसर मिलेगा।

सिंह राशि: आत्मविश्वास बढ़ने से समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। सेहत बेहतर होगी परिवार का सहयोग प्राप्त होगा। निवेश के लिए अच्छा समय है। लेन- देन से लाभ प्राप्त हो सकता है।

तुला राशि: कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। सरकारी क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों को लाभ मिलेगा। आर्थिक समस्याएं दूर होंगी। यह समय आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। लेन- देन के लिए उचित समय है निवेश किया जा सकता है।नया वाहन या मकान खरीद सकते हैं।

सिंह राशि: शुभ परिणाम प्राप्त होंगे। नौकरी की तलाश पूरी होगी। प्रमोशन या आर्थिक लाभ के योग बनेंगे। किसी नए काम की शुरुआत के लिए सही समय है। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए और लेन- देन के लिए समय शुभ है।

धनु राशि: अनुकूल परिणाम प्राप्त होंगे। संतान की उन्नति होने से मानसिक शांति भी मिलेगी। वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। निवेश के लिए उचित समय है।

पृथ्वी और उसके चारों ओर घूमने वाले अन्य ग्रहों पर जीवन और प्रकाश का स्रोत है। खगोल विज्ञान के अनुसार, सूर्य एक तारा है, लेकिन वैदिक ज्योतिष में, इसे एक ऐसा ग्रह माना जाता है जो जातक की आत्मा की ऊर्जा का निर्माण करता है। यह अधिकार, शक्ति और प्रभुत्व का प्रतीक है। जब इसे अनुकूल स्थिति में रखा जाता है, तो यह जातक को इच्छाशक्ति, साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व कौशल का आशीर्वाद देता है। जब यह कमजोर स्थिति में होता है, तो समस्याओं का कारण बनता है।

 

Anubhav Shukla

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