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मेरे पास फीडबैक है मध्यप्रदेश में ब्यूरोक्रेसी हावी कार्यकर्ताओं की कोई नहीं सुन रहा- शाह

मेरे पास फीडबैक है मध्यप्रदेश में ब्यूरोक्रेसी हावी कार्यकर्ताओं की कोई नहीं सुन रहा- शाह
भोपाल। अमित शाह ने शिवराज कैबिनेट के सदस्यों की बैठक में शुक्रवार को कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश सभी 29 सीटें जीतनी हैं। कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य और कमलनाथ को किसी भी कीमत पर जीतने नहीं देना है। कांग्रेस के ये दोनों ही नेता हमारे विधायकों से तालमेल कर जीत जाते हैं। शाह ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी हावी है। उन्होंने यह दावा 172 लोगों से मिले फीडबैक के आधार पर कही। वे यहीं नहीं रुके, उन्होंने यह भी कहा कि यदि सीएम चाहेंगे तो मैं उनके नाम बता दूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार में वे मंत्री नहीं बनेंगे, संगठन के लिए ही काम करेंगे। संगठन के लिए रोज 17 घंटे समय देना होता है। मंत्री पद से न्याय नहीं कर पाऊंगा। 
कौन हैं पंचायत मंत्री? फिर भार्गव पर बिफरे शाह…
शाह ने मध्य प्रदेश के कामकाज का लेखा- जोखा जिन लोगों से लिया, वे रिटायर्ड अफसर, मध्य प्रदेश के  प्रतिष्ठित व्यक्ति और पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं।बैठक शुरू होते ही शाह ने कहा- कौन है पंचायत मंत्री, खड़े हो जाएं। यह सुनते ही  पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव खड़े हो गए।
शाह ने सवाल किया- पंचायतों को पैसा कैसे दिया जाता है? भार्गव बोले- पंचायतों के खातों में ट्रांसफर किया जाता है। यह सुनते ही शाह बिफर पड़े। उन्होंने कहा- मेरे पास फीडबैक है कि मध्य प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी हावी है। कार्यकर्ताओं की कोई नहीं सुन रहा। शाह ने मंत्रियों से कहा कि कांग्रेस के लोगों को असहज करें और अपने साथ जोड़ने की कोशिश करें, लेकिन उनके कोई काम न करें।
खुलकर बोलें सांसद-विधायक, नहीं कटेगा किसी का टिकट
सांसदों और विधायकों की बैठक में अमित शाह के सामने खुलकर सरकार और संगठन के बीच तालमेल न होने की कलई खुल गई। संगठन पदाधिकारियों के सामने जब सांसद- विधायकों ने बोलने में कुछ संकोच किया तो उन्होंने साफ कर दिया कि खुलकर बोलो…टिकट नहीं कटेगा।
एडजस्ट नहीं करने वालों का टिकट कटेगा
लक्ष्मीनारायण यादव (सांसद): जब हम क्षेत्र में जाते हैं तो विधायक सहयोग नहीं करते। ऐसे में कैसे क्षेत्र में जाएं।
अमित शाह: समन्वय होना चाहिए, जो विधायक पार्टी लाइन पर नहीं चलेगा, उसका टिकट काट देंगे।
प्रहलाद पटेल (सांसद): पहले समस्याओं का निपटारा संभाग स्तर पर हो जाता था। अब प्रदेश स्तर पर आना पड़ता है। लगता है कि प्रदेश के कोर ग्रुप की महत्ता कम हो गई है। अमित शाह: हम सुझाव पर ध्यान देंगे।
कृष्णमुरारी मोघे: अब संगठन में सहज संवाद खत्म हो गया है। कार्यकर्ता अपनी बात रखने से डरता है। हमें इस बदलाव को रोकना होगा।
अमित शाह: यह मेरी जानकारी में है।
वेद प्रकाश शर्मा: (प्रदेश कार्यसमिति सदस्य) जिस तरह आप राज्यों के दौरे कर रहे हैं, प्रदेश पदाधिकारियों को भी जिलों के दौरे करना चाहिए।
शाह: प्रदेशाध्यक्ष और संगठन महामंत्री संगठन को मजबूत करने निकलें।
ब्लैकमनी से पार्टी के लिए चंदा न लें, छवि खराब होती है 
– अमित शाह ने कहा कि पार्टी में ब्लैकमनी से चंदा लेने पर रोक लगना चाहिए। चंदा सिर्फ चेक या ड्राफ्ट से ही लिया जाए। बीजेपी देश की सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए हमारी जिम्मेदारी बनती है कि पारदर्शिता बरती जाए, ताकि कोई हम पर उंगली न उठा सके। 
– उन्होंने कहा कि कोशिश ऐसी हो कि बाहर से चंदा लिया ही नहीं जाए, कार्यकर्ताओं के चंदे से ही कामकाज चले। 
दौरा करें, तभी संगठन मजबूत होगा
शाह ने कहा कि जब में दिल्ली से देशभर के राज्यों का दौरा कर सकता हूं तो आप भी भोपाल से बाहर निकलकर प्रदेश के ब्लाॅक और बूथ लेवल तक दौरा करें, तभी संगठन मजबूत होगा।
उन्होंने सांसदोंं और विधायकों को नसीहत दी कि यह पार्टी लाखों लाख कार्यकर्ताओं की मेहनत से खड़ी हुई है। इसलिए हम सादगी और पारदर्शिता चाहते हैं। 
बीजेपी ने 4 साल में 159 करोड़ चंदा बिना ब्योरे के लिया: एडीआर 
– 2012 से 2016 तक चार साल में बीजेपी ने करीब 159 करोड़ का चंदा कोई ब्योरा दिए बगैर लिया।
पार्टी ने यह चंदा देने वालों का पैन, आधार या निवास की डिटेल नहीं दी है। यह खुलासा एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म की रिपोर्ट में हुअा है।

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