Sunday, November 1, 2026
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कैलाश पर्वत का रहस्य, जहां होते हैं शिव के साक्षात दर्शन

कैलाश पर्वत का रहस्य: तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत का रहस्य सर्वविदित है़। जिस रहस्य का पता लगाने के लिए एक बार एक बौद्ध योगी, जिसका नाम मिलारेपा था; वे बहुत हिम्मत से रास्ते की अनेकों कठिनाइयों का सामना करते हुए समुद्र तल से 22000 फीट ऊंचाई पर चढ़ गये।

कैलाश पर्वत का रहस्य, जहां होते हैं शिव के साक्षात दर्शन

क्योंकि उनके मन में एक ही जिज्ञासा थी कि वह इस कैलाश पर्वत से संबंधित रहस्यमय तथ्यों की तलाश कर सकें। लेकिन बताते हैं कि उन बौध्द योगी मिलरेपा ने कैलाश पर्वत पर चढ़कर वहाँ जो कुछ चमत्कारिक दृश्य देखा तो उसे देखकर उनका मुख शब्द रहित हो गया।

वह कैलाश पर्वत का वर्णन अपने शब्दों में नहीं कर पाये। क्योंकि वहाँ की अलौकिकता शब्दों से परे थी। यह वह देव स्थान है़ जो दिव्य, भव्य और दुर्लभ रहस्यों से भरा हुआ है। इसलिए इसके वर्णन को शब्दों में बांधा जाना संभव ही नहीं है़। क्योंकि वहाँ देवों के देव महादेव स्वयं साक्षात विराजमान हैं।

इसलिए वहाँ की अद्भुत विलक्षणता की व्याख्या कर पाना किसी के भी बस की बात नहीं है। आज हम इसी कैलाश पर्वत के उन 10 रहस्यों की चर्चा करेंगे, जिसको जिस किसी ने भी जाना वो आश्चर्यचकित रह गया।

यहाँ भगवान शिव के बसने का रहस्य

इस कैलाश पर्वत से संबंधित यह बात हर किसी के मुँह से सुनी जाती है़ कि इस पर्वत पर भगवान शिव रहते हैं। आइये जानते हैं कि लोगों के द्वारा ऐसा क्यों कहा जाता है़? इस बात का सच क्या है़? इसके लिए हमने शिव पुराण, स्कंद पुराण और मत्स्य पुराण आदि ग्रंथो के पन्नों को पलट डाला। हमें आश्चर्य हुआ कि इन सभी ग्रंथो में कैलाश पर्वत से संबंधित तथ्यों को उजागर करने के लिए अलग से लिखा गया हैं। जिसमें इस कैलाश पर्वत की भरपूर पौराणिक महिमा गायी गयी है़।

इन पुराणों में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि इस कैलाश पर्वत पर भगवान शिव का निवास रहा है। अब मन में यह प्रश्न उठता है़ कि भगवान शिव ने अपने रहने के लिए इस कैलाश पर्वत को ही क्यों चुना? इस बात के पीछे क्या रहस्य है? इस संबंध में संत-महात्माओं का कहना है़ कि धरती के केंद्र में स्थित होने के कारण ही संभवतः भगवान शिव ने कैलाश पर्वत को ही अपना निवास स्थान बनाया। ताकि वह इस जगह से पूरी सृष्टि को संचालित कर सकें।

कैलाश पर्वत पर किसी के भी न चढ़ पाने का रहस्य 

ऐसे में जहाँ भगवान हैं वहाँ मानव का पहुँच पाना कठिन है़। इसीलिए कैलाश पर्वत वह परम देवत्व का स्थान है, जहाँ किसी व्यक्ति का पहुंच पाना संभव नहीं है़। ऐसा भी कहा जाता है़ कि इस पर्वत की अदृश्य शक्तियाँ स्वयं नहीं चाहती कि कोई मानव इस पर्वत पर चढ़ सके। यह परम आश्चर्य ही है कि कैलाश पर्वत से ऊँचे माउंट एवरेस्ट पर तो लोग पहुंच चुके हैं।

लेकिन इस पर्वत की रहस्यमय शक्ति के द्वारा रोके जाने के कारण कोई इस कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाता। अनेक लोगों ने इस कैलाश पर्वत पर चढ़ने का प्रयास किया। लेकिन असफल रहे। इस पर्वत के रहस्य को हजारों किलोमीटर दूर से ही लोगों ने महसूस किया। उन्हें आभास हुआ कि इस कैलाश पर्वत पर कोई अलौकिक रोशनी है जो दुनिया में कहीं और नहीं है।

कैलाश पर्वत की पवित्र ध्वनियों का रहस्य

कहते हैं कि कैलाश पर्वत के आसपास ॐ की ध्वनि गूंजती रहती है। कुछ लोगों को इस कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के डमरू की आवाज भी सुनाई दी है। लोगों को इस पर्वत के आसपास हजारों फुट ऊंची विशालकाय जटाधारी  आकृति का आभास होता है। ऐसा लगता है कि भगवान शिव तपस्या में लीन हैं। कुछ व्यक्तियों ने इस पर्वत पर जब चढ़ाई शुरू की तो उनके पैर धरती में जम गये।

ऐसा लगता था की कोई शक्ति उन्हें रोकने का प्रयास कर रही है। तिब्बत में स्थित इस कैलाश पर्वत पर जब वहां के कुछ धर्मगुरुओं द्वारा पहुंचने की कोशिश की गई तो अचानक सैकड़ों शंख के स्वर उनके कानों में गूंजने लगे। जब उन शंख की ध्वनियों को सुनना असहनीय हो गया तब वे धर्मगुरु अपनी यात्रा को बीच में ही रोक कर वापस आ गये।

पृथ्वी का केंद्र होने का रहस्य

भौगोलिक स्थिति के अनुसार कैलाश पर्वत जिस स्थान पर स्थित है वह हमारी धरती का केंद्र बिंदु है। यही वह स्थान है जहां पृथ्वी को संचालित करने वाली तमाम शक्तियां प्रवाहित होती हैं। यही वह स्थान है जहां से विश्व में बहने वाली तमाम नदियां जैसी ब्रह्मपुत्र, सिंधु और सतलुज आदि प्रकट होती हैं और पूरी धरती को अपने निर्मल जल से पवित्र कर देती हैं।

यहां पश्चिम में मानसरोवर और दक्षिण में राक्षस ताल झील है। ऐसा कहा जाता है कि जहाँ मानसरोवर झील भगवान शंकर का आशीर्वाद है जिसके स्पर्श मात्र से रोग, शोक और भय से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं राक्षस ताल झील का जल मानव के लिए विष तुल्य है ।

कैलाश पर्वत की बनावट का रहस्य

यदि आप कैलाश पर्वत के दर्शन करें तो आप पाएंगे कि यह पर्वत अन्य पर्वतों की तुलना में बिल्कुल अलग और दिव्य है। कैलाश पर्वत के पिरामिडनुमा आकार को देखकर ऐसा लगता है जैसे की किसी अलौकिक शक्ति ने अपने हाथों से इस पर्वत को रचकर यहाँ रख दिया हो। क्योंकि कैलाश पर्वत जैसे दिव्य दर्शन कहीं अन्यत्र नहीं मिलते ।

संत-महात्माओं का कथन है कि इस कैलाश पर्वत की रचना स्वयं पार्वती जी ने अपनी तपस्या से की थी। इसीलिए इस स्थान पर आकर एक नए जीवन की अनुभूति होती है। क्योंकि इस स्थान पर मनुष्य की सांसे यहाँ की दिव्य शक्ति से संचालित होने लगती हैं।

कैलाश पर्वत पर न पहुंच पाने का रहस्य

भौगोलिक जानकारों के अनुसार इस कैलाश पर्वत का स्थान बदलता रहता है। जिसके कारण इस कैलाश पर्वत पर पहुंच पाना एक असंभव कार्य है। कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि यह कैलाश पर्वत अपने स्थान पर घूमता रहता है। जिसके कारण यहाँ आने वाले को दिशा भ्रम हो जाता है और वह इस पर्वत पर  चढ़ाई करते समय यह भूल जाता है कि वह सही रास्ते पर जा रहे है अथवा गलत।

इस कैलाश पर्वत पर पहुँचने के लिए चढ़ाई करने वाले लोगों का यह भी कहना है कि यह कैलाश पर्वत अपने स्थान पर कभी आगे, तो कभी पीछे, तो कभी दाएं तो कभी बाएं खिसकता हुआ नजर आता है। जिस तिलस्म को देखकर पर्वतारोही वहां तक पहुंचने का अपना साहस खो देते हैं। कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि कैलाश पर्वत पर स्थित अदृश्य शक्ति यहाँ के रहस्य को रहस्य ही बनाए रखना चाहती है। इसीलिए कैलाश पर्वत पर विजय प्राप्त करना आसमान से  तारे तोड़ने के समान है।

कैलाश पर्वत के आस-पास उम्र के तेजी से बढ़ने का रहस्य

एक अंग्रेज जिसका नाम लॉरेंस डिसूजा था। उसने एक बार मन में ठाना कि मैं इस अजेय कैलाश पर्वत पर चढ़ कर के ही रहूंगा। इसके बाद उसने कैलाश पर्वत पर जाने के लिए अपनी चढ़ाई शुरू कर दी। लेकिन वह भी आधे रास्ते से ही लौट आया। लेकिन जब उसने अपनी यात्रा के अनुभवों को लोगों से साझा किया तो लोग उसकी बातों को सुनकर आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने बताया कि जब मैंने चढ़ाई आरंभ की तो शुरू में सब कुछ सामान्य था।

लेकिन जैसे -जैसे मैं आगे बढ़ता जा रहा था वैसे वैसे ही कुछ ऐसी अचंभित कर देने वाली घटनाएं मेरे साथ होने लगीं थीं। जिसे देखकर मैं बहुत आश्चर्यचकित था। उस अंग्रेज व्यक्ति ने बताया कि जब मैं इस यात्रा पर निकला था तो उस समय मेरी उम्र केवल 30 वर्ष की थी। इसीलिए मेरे सर के बाल पूरी तरह काले थे। लेकिन जैसे-जैसे मैं कैलाश पर्वत की चढ़ाई में आगे बढ़ता जा रहा था वैसे वैसे मेरे बाल सफेद होते जा रहे थे।

मेरे चेहरे और हाथों पर झुर्रियां नजर आने लगी थीं। मैंने अपनी शारीरिक क्षमता में भी इस बात को महसूस किया कि अब मैं जवान से बूढ़ा हो चला था। उस अंग्रेज ने बताया कि जब मैंने अचानक अपनी शारीरिक स्थिति में यह परिवर्तन देखा तो बेहद घबरा गया और कैलाश पर्वत पर चढ़ने का अपना इरादा त्याग दिया। वैज्ञानिक इस स्थान की जलवायु को पर्वतारोहियों के लिए प्रतिकूल मानते हैं। इसीलिए वह कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाते ।

चीनी पर्वत ल्हा चोओ और होंग चो का रहस्य

कैलाश पर्वत दो अन्य चीनी पर्वत ल्हा चोओ और होंग चो के बीच स्थित है। यह दोनों पर्वत भी कैलाश पर्वत के रहस्यमय वातावरण से प्रभावित हैं। क्योंकि इन दोनों पर्वतों से भी तरह-तरह की आवाजें सुनाई देती हैं। उन आवाजों को सुनकर ऐसा लगता है कि इन पर्वतों पर कोई अदृश्य शक्ति रहती है। कहने का अर्थ यह है कि यह दोनों अन्य चीनी पर्वत भी कैलाश पर्वत के आसपास में रहने के कारण प्रभावित हैं।

मोक्ष प्राप्ति का रहस्य

भारतीय ऋषि-मुनि ही नहीं बल्कि तिब्बत के धार्मिक गुरुओं का भी ऐसा मानना है कि यदि कैलाश मानसरोवर की तीन अथवा तेरह परिक्रमा की जाये तो उस व्यक्ति को रोग, शोक और भय से मुक्ति मिलती है और उसके पापों का नाश होता है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि इस कैलाश मानसरोवर की 108 बार परिक्रमा करने से मनुष्य सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाता है और मोक्ष को प्राप्त करता है। कैलाश मानसरोवर की परिक्रमा लगभग 40 किलोमीटर की दूरी है।

कैलाश धूप का रहस्य

इस क्षेत्र में एक विशेष प्रकार की वनस्पति पाई जाती है जिसे कैलाश धूप कहा जाता है। इस कैलाश धूप को भगवान  शिव के प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। लोग ऐसा मानते हैं कि यह कैलाश धूप नाम की वनस्पति एक तरह से संजीवनी है जिसको ग्रहण करने वाले चिरंजीवी बनते हैं ।

Anubhav Shukla

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