
छात्राओं को भू नाडेप खाद एवं बी जामृत निर्माण का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।
कटनी। प्रधानमंत्री कॉलेज आफ एक्सीलेंस शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय कटनी में आत्मनिर्भर स्वावलंबी एवं स्वरोजगार स्थापित करने के लिए इंटर्नशिप कर रही अध्ययन रत छात्राओं को प्राचार्य डॉ सुनील कुमार बाजपेई के मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण समन्वयक डॉक्टर व्ही के द्विवेदी के सहयोग से जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अंतर्गत भू नाडेप द्वारा कंपोस्ट निर्माण के अंतर्गत प्रशिक्षण में बतलाया गया कि यह जमीन के ऊपर तैयार किया जाने वाली संरचना है इसमें ग्राम में कचरा गोबर आदि सामग्री को व्यवस्थित कर 4 से 5 फीट ऊंचाई का एक आयताकार ढेर बना दिया जाता है। खाद बनाने के लिए कचरे को गीलाकरना आवश्यक है इस ढेर को चारों तरफ से गीली मिट्टी से छपाई कर बंद कर दिया जाता है बंद करने के दो से तीन दिन बाद जब मिट्टी कड़ी हो जाए तब गोल या आयताकार 7 से 8 इंच गहरी तथा नौ नौ इंच के अंतर पर छिद्र बना दिए जाते हैं जिससे वायु संचार बना रहता है तथा आवश्यकता अनुसार पानी डालते रहते हैं यह कंपोस्ट खाद 90 से 120 दिन में पककर तैयार हो जाती है अच्छी तरह पक्की हुई भुरभुरी भूरे रंग की दुर्गंध रहित होती है जिसमें सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं तथा तीन वर्ष तक खाद का असर खेत में बना रहता है जिससे बाजार पर निर्भरता कम होती है तथा खेती की लागत में कमी आती है। फसलों में उगरा जड़ सड़न पौध गलनकंडवा आदिरोगो के नियंत्रण के लिए जैविक बीज उपचार बी जामृत बनाने के लिए देसी गाय का गोबर 5 किलोग्राम एवं गोमूत्र 5लीटर बुझा हुआ चूना ढाई सौ ग्राम पानी 20 लीटर आदि वस्तुओं को ड्रम में घोलकर 24 घंटे के लिए रख देते हैं दिन में दो बार लकड़ी से हिलाया जाता है अब इस घोल को बीजों के ऊपर डालकर बीजकी सिंचाई करें और छाया में रखें बाद में बीज को सुखाकर बोनी करने का तकनीकी प्रशिक्षण एवं बनाकर विद्यार्थियों को दिखाया गया। छात्राओंको एजोला चार गड्ढा विधि से केंचुआ खाद निर्माण का अवलोकन कराया गया। महाविद्यालय के वनस्पति उद्यान में इन संरचनाओं के अवलोकन एवं भ्रमण के समय प्रोफेसर श्रीमती ज्योत्सना आठ्या एवं छात्राएं उपस्थित रही।








