विद्यार्थियों को केंचुआ खाद निर्माण एवं वर्मीवाश निर्माण का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।
सूरज साहू कटनी। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ आर्थिक रूप से सशक्त बनाने एवं आत्मनिर्भर स्वावलंबी तथा स्वरोजगार स्थापित करने के लिए जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत शासकीय आरके गौतम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुरवारी में प्राचार्य संघ रत्नभे लावेके मार्गदर्शन में जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा विद्यार्थियों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया ।ग्राम में उपलब्ध कचरा एवं गोबर फसल अवशेष पत्तियां डंठल खरपतवार नींदा आदि को छोटे-छोटे टुकड़ों में करके 1 सप्ताह तक पानी डालकर नमी बनाकर रखते हैं जिससे कचरा ठंडा हो जाए इसमेंआइसीनीया फोटीडा केंचुआ डालते हैं जो 30 से 45 दिन मेंखाद बना देते हैं। प्रति एकड़ 8 से 10 क्विंटल केंचुआ खाद की आवश्यकता होती है। जिसमें सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। भूमि की गुणवत्ता में सुधार जलधारण क्षमता में वृद्धि तथा फसलों में कीट एवं रोग कम लगते हैं फलों सब्जियों और अनाजों का उत्पादन बढ़ जाता है पौष्टिक स्वादिष्ट रंग एवं आकार अच्छा हो जाता है। भूमि में पाए जाने वाले नाइट्रोजन फास्फोरस और पोटाश कैल्शियम एवं अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व की उपलब्धता बढ़ती है ऐसा पाया जाता है कि मिट्टी में नाइट्रोजन 7 गुना फास्फोरस 11 गुना एवं पोटाश 14 गुना बढ़ता है केंचुआ एवं केंचुआ खाद का उपयोग मिट्टी की दृष्टि से पर्यावरण की दृष्टि से लाभ एवं कृषकों की दृष्टि से लाभ। केंचुआ एवं केंचुआ खाद से वार्षिक आय तथा विभिन्न फसलों में उपयोग की विधि का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। वर्मी वाश का निर्माण तथा फूल फल वर्धक तथा पौधवर्धक के लिए उपयोग करने का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।

