जोहार! नमस्कार! महामहिम द्रोपदी मुर्मू ने कहा- नागरिकों की आशा-आकांक्षा और अधिकारों के प्रतीक का अभिनंदन

जोहार! नमस्कार! महामहिम द्रोपदी मुर्मू ने कहा- नागरिकों की आशा-आकांक्षा और अधिकारों के प्रतीक का अभिनंदन

नई दिल्ली : झारखंड की पहली महिला राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार की सुबह 10.15 बजे संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में भारत के 15वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ग्रहण किया. उन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमण ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण के बाद अपने संबोधन में द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जोहार ! नमस्कार ! मैं भारत के समस्त नागरिकों की आशा-आकांक्षा और अधिकारों की प्रतीक इस पवित्र संसद से सभी देशवासियों का पूरी विनम्रता से अभिनंदन करती हूं. आपकी आत्मीयता, विश्वास और आपका सहयोग, मेरे लिए इस नए दायित्व को निभाने में मेरी बहुत बड़ी ताकत होंगे.

आजादी के 50वें वर्ष में मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई

शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कि मेरे इस निर्वाचन में देश के गरीब का आशीर्वाद शामिल है, देश की करोड़ों महिलाओं और बेटियों के सपनों और सामर्थ्य की झलक है. उन्होंने मेरे लिए बहुत संतोष की बात है कि जो सदियों से वंचित रहे, जो विकास के लाभ से दूर रहे, वे गरीब, दलित, पिछड़े तथा आदिवासी मुझ में अपना प्रतिबिंब देख रहे हैं. ये भी एक संयोग है कि जब देश अपनी आजादी के 50वें वर्ष का पर्व मना रहा था, तभी मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी और आज आजादी के 75वें वर्ष में मुझे ये नया दायित्व मिला है.

सभी सांसदों और विधायकों का आभार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक समय में जब भारत अगले 25 वर्षों के विजन को हासिल करने के लिए पूरी ऊर्जा से जुटा हुआ है, मुझे ये जिम्मेदारी मिलना मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है. उन्होंने कहा कि भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर निर्वाचित करने के लिए मैं सभी सांसदों और सभी विधानसभा सदस्यों का हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं. आपका मत देश के करोड़ों नागरिकों के विश्वास की अभिव्यक्ति है. उन्होंने कहा कि मुझे राष्ट्रपति के रूप में देश ने एक ऐसे महत्वपूर्ण कालखंड में चुना है, जब हम अपनी आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं. आज से कुछ दिन बाद ही देश अपनी स्वाधीनता के 75 वर्ष पूरे करेगा.

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