उत्तराधिकारियों के पार्क की खातिर गरीब आश्रितों पर प्रशासन का कहर!

उत्तराधिकारियों के पार्क की खातिर गरीब आश्रितों पर प्रशासन का कहर!

कटनी। प्रदेश व केन्द्र सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है। जिसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की धर्मपत्नी को छोड़ कर उसके किसी दूसरे आश्रित को लाभ प्रदान किया जाता हो लेकिन कटनी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर कम तथा उनके नाम पर बनाए गए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन पर जिला व नगर निगम प्रशासन कुछ ज्यादा ही मेहरबान है।

सेनानियों के नाम पर कटनी में बनाए गए इस संगठन को पहले तो पुरानी कचहरी परिसर में भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के सामने स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक पर कब्जा दिलाया और अब आज स्मारक के बाजू से कुछ वर्ष पूर्व जिला प्रशासन की योजना के तहत विकसित की गई मिनी चौपाटी को हटा दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस की मौजूदगी में नगर निगम के अतिक्रमण दस्ते के द्धारा बिना पूर्व सूचना के बलपूर्वक की गई कार्रवाई से एक ही झटके में यहां चायपान का व्यापार कर अपना घर परिवार चलाने वाले लगभग एक दर्जन से अधिक दुकानदार सड़क पर आ गए।

उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक की बेशकीमती जमीन पर कब्जा जमाने के बाद कुछ समय पूर्व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन ने पुरानी कचहरी स्थित सेनानी शहीद स्मारक में पार्क बनाने की मांग कलेक्टर व नगर निगम प्रशासन से की थी। जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन को लिखे गए पत्र में कहा गया था कि यदि स्मारक के रिक्त पड़े स्थान को अतिक्रमण मुक्त करा दिया जाए, तो शासन का सहयोग करते हुए पार्क की देखरेख व सुंदरता की समस्त जिम्मेदारी उत्तराधिकारी संगठन उठाएगा लेकिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के पदाधिकारियों ने जिला और नगर निगम प्रशासन को लिखे गए पत्र में इस बात का कहीं भी उल्लेख नहीं किया था कि रिक्त पड़े स्थान पर लग रही चाय, पान व नाश्ते की दुकानों को यहां से हटाकर कहां स्थापित करवाया जाएगा। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कुछ साल पहले कचहरी चौक में लग रही इन दुकानों को तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों ने पुरानी कचहरी में रिक्त पड़े स्थान को मिनी चौपाटी घोषित करते हुए यहां पर दुकानें लगाने की अनुमति दी थी और आज इस संगठन को यह बेशकीमती जगह उपलब्ध कराने प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस की मौजूदगी में नगर निगम के अतिक्रमण दस्ते ने यहां के एक दर्जन से अधिक व्यापारियों को बलपूर्वक बेदखल कर दिया। जिसकी वजह से प्रशासन की योजना के तहत यहां व्यापार कर अपना व अपने परिवार को पेट पालने वाले युवक सड़क पर आ गए।

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