सावन विशेष: जानें, क्या है शिव जी के तीसरे नेत्र का रहस्य
धर्म डेस्क। सृष्टि के आदि में जब केवल अंधकार ही था, न दिन था, न रात्रि, न सत् (कारण) और न असत् (कार्य) तब केवल एक र्निवकार शिव ही विद्यमान थे। भूत भावन भगवान सदाशिव भोले नाथ भंडारी पिता अनादि-अजन्मा हैं। शिव का अर्थ है कल्याण करने वाला पर उनका दूसरा प्रसिद्ध नाम रुद्र भी … Read more