कांग्रेस जम्मू कश्मीर में लेगी बिहार का बदला!

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नई दिल्ली: बिहार में हुए सियासी उलटफेर के बाद अब अगला नंबर जम्मू कश्मीर का है अंतर सिर्फ इतना होगा कि बिहार में भाजपा सत्ता में आई है और जम्मू कश्मीर में सत्ता से बाहर हो सकती है। पिछले तीन दिन में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा दिए गए बयान राज्य के सियासी भविष्य की तरफ इशारा कर रहे हैं। जिस तरीके से महबूबा ने तिंरगे को लेकर बयान दिया है वे बयान महबूबा और मोदी के सियासी ब्रेकअप का आधार बन सकता है। महबूबा भाजपा को उकसाने के लिए इस तरह के बयान दे रही हैं और भाजपा महबूबा के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया भी दे रही है। 
महबूबा की मजबूरी
2014 में विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के साथ सरकार बनाने के साथ ही महबूबा का कोर वोटर उससे नाराज हो गया और ये नाराजगी अबतक जारी है। इसका कारण पीडीपी और भाजपा का विाचरीक आसमनता है। महबूबा को लगता है कि भाजपा के साथ ये सियासी गठजोड़ा जितना लंबा चलेगा उतना ही पीडीपी को इसका नुकसान होगा। यही कारण है कि एनआईए और अन्य जांच एजैंसियों द्वारा अलगाववदियो पर मारे गए छापों के बाद महबूबा ने अलगाववादियों के पक्ष में स्टैंड लिया और चेतावनी भरे लहजे में यहां तक बोल गई कि कश्मीर में तिरंगे का कोई संरक्षक नहीं बचेगा। ऐसे बयानों के जरिए महबूबा भाजपा को गठजोड़ तोडऩे के लिए उकसाने के साथ साथ अपने कोर वोटर को संदेश भी दे रही हैं।भाजपा क्यों मजबूर

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद पीडीपी के साथ गठजोड़ करने के वक्त से ही कश्मीर का मुद्दा भाजपा के लिए नासूर बना हुआ है। भाजपा ने कश्मीरियों के दिल जीतने के तमाम प्रयास किए लेकिन ये प्रयास विफल साबित हुए हैं और कश्मीर में शांति स्थापित नहीं हो पा रही। लिहाजा भाजपा भी पीडीपी से पिंड छुड़वाना चाहती है। 2005 के मामलों में अलगावावदियों की गिरफ्तारी इसी दिशा में भाजपा का कदम माना जा रहा है। भाजपा को पता है कि उसकी सहयोगी पीडीपी को ये कार्रवाई रास नहीं आएगी लिहाजा भाजपा ने इस मुद्दे पर कोई समझोता न करने के लहजे में अक्रामक रुख अपना लिया है। यदि पीडीपी और भाजपा में ये गतिरोध कायम रहता है तो आने वाले दिनों में कश्मरी राजनीतिक अस्थिरता की तरफ बढ़ सकता है। 

विधानसभा की स्थिति
87 सीटों की जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 28 सीटों के साथ पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी है। जबकि 25 सीटों के साथ भाजपा दूसरे 15 सीटों के साथ नेश्नल कॉन्फ्रेंस तीसरे और कांग्रेस 12 सीटों के साथ चौथे नंबर पर है। जम्मू कश्मीर पीपल कॉन्फ्रेंस के पास 2 जम्मू-कश्मीर पिपुल डेमोक्रेटिक फ्रंट के पास 1, सीपीआई के पास 1 सीटें हैं जबकि 3 सीटें आजाद विधायकों के पास है। महबूबा यदि भाजपा का साथ छोड़ती है तो भी कांग्रेस की 12 सीटों सीपीआई की 1 सीट व 3 अन्य विधायकों को मिलाकर 44 सीटों के साथ बहुमत हासिल कर सकती है और जम्म कश्मीर में भी नीतीश कुमार की तहर बिल्कुल उसी तरह मुख्यमंत्री बनी रह सकती हैं जिस तरह जदयू ने लालू का साथ छोड़कर भाजपा के साथ सरकार बनाई है। लेकिन ये काफी हद तक गर्वनर की भूमिका पर निर्भर करेगा। जाहिर सी बात है भाजपा सरकार से निकलने के बाद राज्य में दूसरी सरकार नहीं चाहेगी। लिहाजा एक विकल्प राज्य में राष्ट्रपति शासन का भी बनता है। लेकिन इस स्थिती में भी कमान्ड सीधी केंद्र के हाथ में आ जाएगी और राज्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी का ठिकरा भाजपा पर फूटेगा।

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