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बच्चों की मौत के मामले में SC का दखल से इन्कार, कहा- CM रख रहे नजर

नई दिल्‍ली/ गोरखपुर के अस्पताल में हुई बच्चों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने कहा है कि स्थिति पर सीएम योगी आदित्यनाथ इस पर नजर रखे हुए हैं।
मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह एक राज्य के जिले का मामला है और इसके लिए याचि हाईकोर्ट जा सकते हैं। अदालत ने आगे कहा कि हमने टीवी पर देखा है मुख्यमंत्री मामले की निगरानी कर रहे हैं वहीं केंद्र से भी कई मंत्री आए हैं।
बता दें कि गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी के कारण 60 से अधिक बच्चों की मौत हो गयी।
जानिए क्या कहते हैं कानून के जानकार
कानून के जानकार कहते हैं कि इस मामले में अस्पताल प्रशासन और आक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी दोनों पर घोर लापरवाही और गैर इरादतन हत्या का मामला बनता है। कंपनी भी नोटिस देने की आड़ लेकर नहीं बच सकती क्योंकि उसे मालूम था कि आक्सीजन की सप्लाई रुकने का क्या परिणाम होगा।
ये कोई दुर्घटना नहीं थी बल्कि मैनमेड त्रासदी है क्योंकि आक्सीजन की कमी की जानकारी पहले से थी। अस्पताल प्रशासन को ये भी काफी पहले से पता था कि आक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी को भुगतान नहीं हुआ है और वह आपूर्ति रोक सकती है। कानून साफ है कि अगर जानबूझकर हुई लापरवाही में किसी की जान जाती है तो दोषी व्यक्ति क्रिमिनल निग्लीजेंस का जिम्मेदार होता है।
वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी कहते हैं कि इस मामले में जिस जिस की जानकारी में था कि अस्पताल में आक्सीजन की कमी है और उससे मरीजों की मौत हो सकती है, फिर भी उन्होंने जरूरी उपाय नहीं किये, उन सभी पर आपराधिक मामला बनता है। कंपनी भी जिम्मेदार है। अगर पैसा भुगतान न होने पर आपूर्ति रोकने का उसने नोटिस दिया था, तो भी उसको निश्चित तौर पर आपूर्ति रोकने से पहले समय और वक्त के साथ ठोस रूप से सूचित करना चाहिए था कि इस वक्त से आक्सीजन आपूर्ति नहीं होगी और इसके लिए जरूरी उपाय कर लें।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश एसआर सिंह भी कहते हैं कि कंपनी नोटिस देने भर से नहीं बच सकती। कानून ये मान कर चलेगा कि कंपनी को आक्सीजन की कमी होने के गंभीर परिणामों की जानकारी थी। जानकारी होने के कारण कंपनी पर भी गैर इरादतन हत्या (आइपीसी धारा 304 भाग दो) में मामला बनेगा, जिसमें दस साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। ये क्रिमिनल निग्लीजेंस का केस है। अस्पताल प्रबंधन भी जिम्मेदार है। अस्पताल का यह भी फर्ज था कि वह मरीजों को बताता कि आक्सीजन की कमी होने वाली है और वे कहीं और जा सकते हैं।
योगी ने कहा- दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी कि बनेगी मिसाल
बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के तीसरे दिन रविवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा गोरखपुर पहुंचे। अस्पताल का निरीक्षण किया और अधिकारियों से रिपोर्ट ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना में दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी कि मिसाल बनेगी।
भावुक हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों की मौत दुखद है और किसी को बख्शा नहीं जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गोरखपुर में 85 करोड़ की लागत से रीजनल वायरोलॉजी रिसर्च सेंटर की घोषणा की। इस बीच मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए इंसेफ्लाइटिस वार्ड के प्रभारी डॉ. कफील खान को पद से हटा दिया है और उनकी जगह डॉ. भूपेंद्र शर्मा को नियुक्त किया गया है। अंबेडकरनगर राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पीके सिंह बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य बनाए गए हैं। अस्पताल में रविवार को पांच और बच्चों की मौत हो गई। मरने वालों की संख्या 67 पहुंच गई है जिनमें 44 बच्चे हैं।
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