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कांग्रेस की हार की समीक्षा करेगा पांच सदस्यीय समूह, आजाद बने पार्टी कोविड टास्क फोर्स के अध्यक्ष

बीते चार दशक से कांग्रेस की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे आजाद की नाराजगी को पार्टी के मौजूदा हालत के मद्देनजर नेतृत्व उन्हें दरकिनार करने का जोखिम नहीं उठाना चाहता

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने पांच राज्यों की चुनावी हार के व्यापक विश्लेषण और समीक्षा के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और ठाकरे सरकार में मंत्री अशोक चव्हाण की अगुआई में गठित इस समिति में नाराज चल रहे कांग्रेस नेता मनीष तिवारी को भी शामिल किया गया है।

हार की समीक्षा के लिए समिति बनाने में तत्परता दिखाते हुए कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी में जारी उथल-पुथल को थामते हुए अपना घर दुरुस्त करने पर गंभीर होने का संदेश देने की कोशिश की है।

हार पर गठित इस समूह को दो हफ्ते में अपनी समीक्षा रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपने के लिए कहा गया है।

कांग्रेस कार्यसमिति की सोमवार को हुई बैठक के 24 घंटे बाद ही इस समिति का गठन कर हाईकमान ने यह भी जताने का प्रयास किया है कि पार्टी की लगातार बढ़ती चुनौतियों का रास्ता निकालने के लिए नेतृत्व त्वरित कदम उठाने को तैयार है। अशोक चव्हाण को हार की समीक्षा के लिए गठित समूह की कमान सौंपना वैसे इस लिहाज से दिलचस्प है कि वह दिल्ली की सियासत में कम ही सक्रिय रहे हैं और उनका फोकस महाराष्ट्र की राजनीति पर ही रहा है। इस समिति में चव्हाण और मनीष तिवारी के अलावा कांग्रेस नेतृत्व के प्रति निष्ठावान पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को भी रखा गया है। राजनीतिक लिहाज से राज्यों के साथ राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मनीष तिवारी का समिति में होना जरूर महत्वपूर्ण है। पूर्वोत्तर राज्यों में पार्टी की स्थिति का आकलन करने के मकसद से समूह में लोकसभा सांसद विंसेंट एच पाला को शामिल किया गया है। वहीं, केरल में हुई हार को देखते हुए सूबे से लोकसभा की युवा सांसद ज्योति मणि को इसमें जगह दी गई है। इन दोनों सांसदों को भी कांग्रेस नेतृत्व के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है। मालूम हो कि हार पर समीक्षा के लिए सोमवार को हुई कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी ने पांच राज्यों में पार्टी के खराब प्रदर्शन की बेबाकी से तथ्यपरक समीक्षा करने की घोषणा करते हुए समिति बनाने का एलान किया था।

प्रियंका गांधी और अंबिका सोनी भी टास्क फोर्स में

कांग्रेस में असंतुष्ट नेताओं को दरकिनार नहीं करने का बड़ा संदेश देने की पहल करते हुए सोनिया गांधी ने जी-23 के प्रमुख गुलाम नबी आजाद को कांग्रेस की कोविड-19 रिलीफ टास्क फोर्स की कमान सौंपी है। आजाद की अगुआई में गठित पार्टी की इस 13 सदस्यीय टास्क फोर्स में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा अंबिका सोनी, रणदीप सुरजेवाला, जयराम रमेश, पवन बंसल, केसी वेणुगोपाल, मुकुल वासनिक सरीखे कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। साथ ही कोविड महामारी में पीडि़त लोगों की बेमिसाल मदद के चलते देश-दुनिया में सुर्खियां बटोर रहे युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास को भी इस टास्क फोर्स में शामिल गया गया है। कोरोना महामारी में राष्ट्रीय स्तर पर आम लोगों को राहत पहुंचाने के कांग्रेस के प्रयासों को संगठित स्वरूप देने के मकसद से इस टास्क फोर्स का गठन किया गया है।

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कोविड पर चर्चा के दौरान पार्टी के स्तर पर इस तरह के प्रयास को तेज करने की जरूरत बताई गई थी। गुलाम नबी इस समय कांग्रेस के असंतुष्ट खेमे की अगुआई कर रहे हैं और पार्टी की खामियों को बयान करने में सबसे मुखर भी हैं। कार्यसमिति की सोमवार को हुई बैठक के दौरान पांच राज्यों की हार पर आजाद ने ही सबसे ज्यादा सवाल उठाया था और बंगाल व असम में गठबंधन में हुई चूक को लेकर बेबाक बातें कही थीं। बीते चार दशक से कांग्रेस की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे आजाद की नाराजगी को पार्टी के मौजूदा हालत के मद्देनजर नेतृत्व उन्हें दरकिनार करने का जोखिम नहीं उठाना चाहता। इसीलिए हार पर समीक्षा के लिए गठित समिति में जहां मनीष तिवारी को जगह दी गई है, वहीं पार्टी की कोविड टास्क फोर्स की अध्यक्षता गुलाम नबी आजाद को सौंपी गई है।

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