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न्यू इंडिया में गरीबी के लिए गुंजाइश नहीं: पहले राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा


नई दिल्ली.  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर पहली बार देश संबोधित किया। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों का हमें आर्शीवाद मिला। नेहरू और अंबेडकर को नहीं भुला सकते। आज देश के लिए कुछ कर गुजरने का वक्त है। हमें न्यू इंडिया की तरफ बढ़ना होगा। 2022 के न्यू इंडिया में गरीबी के लिए कोई जगह नहीं है। बता दें कि कोविंद ने 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। 

जानिये कोविंद के स्पीच की अहम बातें…
1) आजादी में महिला और पुरुष दोनों का योगदान था
– कोविंद ने कहा- “आजादी दिलाने वाले देश के महापुरुषों को हम नमन करते हैं। देश के लिए जान देने वाले भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल जैसे स्वतंत्रता सेनानियों को नहीं भूल सकते हैं। पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार बल्लभ भाई पटेल, भीमराम आंबेडकर जैसे महान नेताओं ने देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दिया। हमारी आजादी में महिला और पुरुष दोनों का योगदान था।”
– ” देश की आजादी में सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और झांसी की रानी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। गांधीजी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। सुभाषचंद्र बोस ने जब ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का नारा दिया तो सभी देशवासियों ने उनका साथ दिया।” 
2) मदद करने की भावना शहरों में घट रही है
कोविंद ने बताया- “बचपन की एक घटना याद है। गांव में जब किसी बेटी की शादी होती तो गांव के सब लोग अपना काम बांट लेते थे। जाति और समुदाय का भेद नहीं होता था। वहां साझेदारी का भाव होता था। अगर जरूरत के वक्त अपने पड़ोसियों की मदद करेंगे तो वो भी आपके काम आएंगे। बड़े शहरों में ये भाव कम हुआ है।” 
3) न्यू इंडिया में गरीबी के लिए जगह नहीं
– कोविंद ने कहा- “राष्ट्रपति ने कहा कि देश में गरीबी का उन्मूलन जरूरी है। न्यू इंडिया में गरीबी के लिए जगह नहीं है। 2022 में देश आजादी की 75वीं वर्षगाठ मनाएगा। उस समय तक हर परिवार के लिए घर, मांग के मुताबिक बिजली, बेहतर सड़कें, संचार के साधन, रेल का विकास, तेज और लगातार डेवलपमेंट की जरूरत है।”
– “यह सभी हमारे डीएनए में रचे बसे। देश के लोग समग्र प्रक्रिया में सहभागी बनें। संवेदनशील समाज सभी को अपने में समाहित करें। सभी देश से कटे हुए लोगों को आपस में जोड़ना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। संवेदनशील समाज में बेटा-बेटी और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। कुपोषण को खत्म करने लिए प्रयास करना चाहिए। प्रत्येक भारतीय अपनी क्षमताओं को विकसित करने में खुद का आगे बढ़ाए। ऐसा देश बने जहां हर भारतवासी सुखी हो।” 
4) गैस सब्सिडी छोड़ने वालों को मैं नमन करता हूं
-कोविंद ने कहा- “पीएम की एक अपील पर एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी। मैं ऐसे लोगों को नमन करता हूं। ये उनके अंतर्मन की आवाज थी। क्योंकि ना तो ये आदेश ना कानून। राष्ट्रनिर्माण के लिए भावी पीढ़ी पर ध्यान देने की जरूरत है। अपने बच्चे की साथ ही एक और बच्चे की शिक्षा में मदद करें। किसी भी तरह से ये मदद करें। चाहे स्कूल में दाखिला हो या किताबों की मदद।लेकिन, एक बच्चे कि लिए ये जरूर करें।”
– “ढाई हजार साल पहले बुद्ध ने कहा था- अप दीपो भव। यानी खुद का दीपक जलाओ। अगर हम इस दिशा में सोचें। तो सवा सौ करोड़ दीपक जलेंगे। ये किसी सूरज से कम नहीं होगा।”
5) स्वच्छ भारत का सपना हो साकार
– कोविंद ने कहा- “स्वच्छ भारत हम सभी की जिम्मेदारी है। शौचालय का प्रयोग करना और खुले में शौच को खत्म करना केवल सरकार ही नहीं आप सभी की जिम्मेदारी है। सरकार शौचालय के लिए मदद देती है, लेकिन देश को स्वच्छ बनाने में आम जनता का सहयोग भी अपेक्षित है।”
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