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Snowfall In Uttarakhand: सीजन का पहला हिमपात, बदरीनाथ धाम-हेमकुंड साहिब की चोटियों पर बर्फबारी, तस्वीरें में कैद हुआ नजारा

Snowfall In Uttarakhand: उत्तराखंड, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब में बर्फबारी

Snowfall In Uttarakhand उत्तराखंड में शनिवार को मौसम का मिजाज बदला और सीजन का पहला हिमपात हुआ। बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की चोटियों पर बर्फबारी से नीचे क्षेत्रों में लोगों को ठंडक आ गई। राज्य के लगभग सभी मैदानी और पहाड़ी इलाकों में कहीं रुक-रुक कर बारिश जारी रही तो कहीं बादल छाए हैं। वहीं केदारनाथ यात्रा सुचारू शनिवार को सुचारू की गई।

सुबह 8 बजे तक सोनप्रयाग से 5780 श्रद्धालुओं ने धाम के लिए प्रस्थान किया। राजधानी देहरादून सहित आस पास के क्षेत्रों में भी रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है। उतराखंड में आज भी मौसम बिगड़ा रहेगा। देहरादून, टिहरी और बागेश्वर जिलों में अगले 24 घंटे में भारी बारिश की संभावना है। इसके मद्देनजर मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है। कुछ इलाकों में तेज गर्जना के साथ बौछारें पड़ने और बिजली गिरने की भी आशंका है। ऐसे में मौसम विभाग ने जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब में बर्फबारी

पूर्णागिरि मार्ग पर लादीगाड़ के पास सड़क पर चट्टान गिरने से आवाजाही बंद हो गई। अलबत्ता चट्टान गिरते वक्त आवाजाही नहीं होने से नुकसान नहीं हुआ। चट्टान के लुढ़कने से ठुलीगाड़ से भैरव मंदिर तक आवागमन ठप हो गया। सड़क बंद होने से फंसे बाइक सवारों ने किसी तरह अपने वाहनों को पार कराया।

बदरीनाथ की चोटियों पर बर्फबारी

प्रशासन ने मौसम के मद्देनजर पूर्णागिरि धाम के दर्शन करने पर 19 सितंबर तक रोक लगाई है लेकिन सड़क बंद होने से सेलागाड़ और आसपास के लोगों की आवाजाही पर असर पड़ा है।

उत्तराखंड, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब में बर्फबारी

बारिश से आए मलबे ने चंपावत जिले की 14 ग्रामीण सड़कों पर आवाजाही रोक दी है।

बदला मौसम का मिजाज

चंपावत जिले की ये सड़कें हुईं बंद: बसौटी-रौकुंवर, पुनावे-सिप्टी-न्याड़ी, सूखीढांग-डांडा-मीडार, ठुलीगाड़-भैरव मंदिर, धौन-बड़ौली, स्याला-पोथ, चल्थी-नौलापानी, रौसाल-डूंगराबोरा-चकसिलकोट, डूंगराबोरा-कायल-मटियानी, बगोटी-डूंगरालेटी, बलूटा-पासम, बांकू-सुल्ला पाशम, बाराकोट-कोठेकरा और बाराकोट-मिर्तोली।

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