अगर राहुल नहीं तो प्रियंका को अध्यक्ष बना सकती है कांग्रेस!

राहुल गांधी अगर खुद अध्यक्ष बनने को तैयार नहीं हुए या फिर उनके नाम पर कुछ भी किंतु-परंतु हुआ तो इस बात की पूरी संभावना है कि प्रियंका गांधी को कांग्रेस की कमान सौंपे जाने पर रजामंदी हो जाए। क्योंकि अभी तक किसी भी ऐसे गैर गांधी के नाम पर सहमति नहीं बन सकी है जो सर्वस्वीकार्य हो।

शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ होने वाली पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की निर्णायक बैठक में राहुल की मनाही के बाद विकल्प के तौर पर प्रियंका के नाम पर सहमति बन सकती है। इस फार्मूले पर दस जनपथ परिवार और पार्टी के रणनीतिकारों के बीच समझदारी बन गई है

बताया जाता है कि इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा सक्रिय भूमिका भी प्रियंका गांधी निभा रही हैं। उनकी पहल पर ही गुट-23 के प्रमुख नेताओं और सोनिया गांधी की मुलाकात और बैठक मुमकिन हो सकी है। सोनिया गांधी के साथ इस बैठक में कमलनाथ और प्रियंका गांधी के अलावा राहुल गांधी भी मौजूद रह सकते हैं। जबकि गुट-23 के प्रमुख नेताओं में गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल समेत कुछ अन्य नेता होंगे। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के शामिल होने की भी संभावना है।

लेकिन कमलनाथ ने अब तक जितने भी वरिष्ठ नेताओं से बात की है उनमें ज्यादातर ने दबे स्वर में राहुल के नाम पर असहमति जाहिर की है। जबकि कुछ नेताओं ने तो सीधे-सीधे यहां तक कह दिया है कि हम बिना गांधी के कांग्रेस की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं, लेकिन राहुल की जगह अगर प्रियंका को पार्टी की कमान सौंपी जाए तो ज्यादा बेहतर होगा।

कांग्रेस के टिकट पर दो बार लोकसभा चुनाव लड़ने वाले और प्रियंका गांधी के सलाहकार मंडल के सदस्य आचार्य प्रमोद कृष्णम ने तो इसी साल 22 नवंबर को ट्वीट करके प्रियंका गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग की थी। अपने ट्वीट में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने लिखा, ‘देश के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य़ को देखते हुए कांग्रेस के करोड़ों कार्यकर्ताओं की भावना है कि पार्टी की कमान प्रियंका गांधी को सौंप दी जाए, ताकि मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ पूरे देश में एक जन आंदोलन खड़ा किया जा सके।`

कांग्रेस में प्रियंका को अध्यक्ष बनाने कि मांग पहले भी कई बार उठती रही है, लेकिन दबे स्वर में। कांग्रेस के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी के साथ गुट-23 और अन्य वरिष्ठ नेताओं की बैठक भी प्रियंका की ही पहल पर हो रही है। पिछले दिनों जब कमलनाथ ने दिल्ली आकर प्रियंका गांधी से मुलाकात की और उन्होंने गुट-23 और अन्य वरिष्ठ नेताओं की चिंताओं पर चर्चा की तो प्रियंका ने कहा कि इन सभी नेताओं के साथ कांग्रेस अध्यक्ष की सीधे बातचीत क्यों नहीं कराई जानी चाहिए। बेहतर होगा कि पत्र लिखने या मीडिया में बयानबाजी करने की बजाय ये सभी नेता अपनी बात सीधे कांग्रेस अध्यक्ष से कहें। इससे दोनों के बीच संवादहीनता खत्म होगी और समस्या का कोई हल निकल सकेगा।

कमलनाथ को यह बात जंच गई। तब प्रियंका ने अपने कमरे में लगे इंटरकॉम पर सोनिया और कमलनाथ की बात कराई। जिसमें यह सहमति बनी कि इस तरह की बैठक होनी चाहिए। इसी बातचीत में सोनिया ने कमलनाथ को नेताओं के बीच राहुल के नाम पर सहमति बनाने की जिम्मेदारी भी सौंपी।