राज्य सरकार का लक्ष्य गरीब परिवारों के लिये बेहतर रोजगार – मुख्यमंत्री चौहान

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिये कि स्ट्रीट वेण्डर योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक हितग्राहियों का चयन कर उन्हें लाभान्वित किया जाये। राज्य सरकार का लक्ष्य गरीब परिवारों को बेहतर रोजगार प्रदान करना है। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप में रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस योजना के अच्छे परिणाम मिले हैं। योजना का दायरा बढ़ाया जाये।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव वित्त श्री मनोज गोविल और विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिये शासकीय मदद पहुंचायी जाये। इसे अभियान के स्वरूप में किया जाये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के एकीकृत क्लस्टर तैयार किये जाये। बताया गया कि विभाग द्वारा 19 एकीकृत क्लस्टर के प्रस्ताव तैयार किये गये हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि जिलों में वहां पैदा होने वाली सामग्री, कृषि उत्पादों पर आधारित एकीकृत क्लस्टर विकसित किये जाये। वनवासियों तथा किसानों को योजना का लाभ मिले। बताया गया कि इस योजना में अधोसंरचना विकास, डिस्प्ले तथा मार्केटिंग को भी शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि जो बच्चे इन्नोवेटिव आइडिया रखते हैं उन्हें स्टार्टअप शुरू करने में पूरी मदद दी जाये। बताया गया कि प्रदेश में 1132 पंजीकृत स्टार्टअप है और 39 इंक्यूबेशन सेंटर हैं। इन सभी स्टार्टअप और सेंटर्स को सुदृढ़ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि निर्यात के लिये उच्च गुणवत्ता का उत्पाद बनाने के लिये लघु उद्यमियों को मदद देकर प्रोत्साहित किया जाये। ऐसे उत्पादों का चयन किया जाये जिनको निर्यात के लिये विकसित किया जा सकता है। इस योजना में लघु उद्यमियों को शामिल किया जाये।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि छोटी-बड़ी सभी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की प्रक्रिया को और सहज-सरल बनाया जाये। सभी स्वीकृतियां 30 दिनों के अंदर जारी हो जाये। जिसमें 30 दिन बाद औद्योगिक इकाइयाँ कार्य करना प्रारंभ कर सकें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमियों को आवंटित भूमि का उपयोग केवल उद्योग स्थापना में ही होना चाहिये। यदि कोई उद्यमी इस भूमि का अन्य उद्देश्य से उपयोग करता है तो उक्त भूमि को उससे खाली कराया जाये।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के लघु उद्यमियों द्वारा तैयार उत्पादों को ऑनलाइन मार्केटिंग कम्पनियों से जोड़ने के लिये विभाग समन्वयक का कार्य करें। महाविद्यालयीन विद्यार्थियों को भी इसमें जोड़ा जा सकता है।

औद्योगिक इकाइयों को फेसिलिटेट करने के लिये लाइफ सायकल पोर्टल बनाया जा रहा है। जो कि सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों के लिये सुदृढ़ इको सिस्टम के रूप में कार्य करेगा।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 1896 निवेशक चिन्हाकित किये गये हैं। जिनके द्वारा 5355 करोड़ का पूंजी निवेश होगा और करीब 85 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। लॉकडाउन अवधि में बंद उद्योगों को पुन: चालू करने में शासकीय मदद पहुंचायी गयी। प्रदेश में लगभग सभी औद्योगिक इकाइयां पुन: प्रारंभ हो चुकी हैं। सात नवीन औद्योगिक क्षेत्र चिन्हांकित किये गये हैं, जिसका विकास किया जा रहा है। भारत सरकार के सहयोग से ग्वालियर में अपेरल सेक्टर पर आधारित इंक्यूबेशन सेंटर का निर्माण किया गया है।