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Shinzo Abe: मौत के ढाई महीने बाद क्यों हुआ जापान के पूर्व पीएम का अंतिम संस्कार? समझें पूरी प्रक्रिया

Shinzo Abe: मौत के ढाई महीने बाद क्यों हुआ जापान के पूर्व पीएम का अंतिम संस्कार? समझें पूरी प्रक्रिया

Shinzo Abe जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे का आज स्टेट फ्यूनरल (राजकीय अंतिम संस्कार) टोक्यो में हुआ। इसमें दुनियाभर के 217 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने के लिए टोक्यो पहुंचे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी टोक्यो पहुंचकर आबे को अंतिम विदाई दी। ये दुनिया का सबसे महंगा अंतिम संस्कार बताया जा रहा है। इसमें 97 करोड़ रुपये खर्च हुए।

शिंजो आबे की आठ जुलाई को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोपी को मौके से ही पकड़ लिया गया था। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि आठ जुलाई को जब आबे की मौत हो गई थी, तो अब ढाई महीने बाद उनका अंतिम संस्कार क्यों हुआ है? जापान में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया क्या होती है? आइए जानते हैं…

क्यों आज हो रहा अंतिम संस्कार?

दरअसल आठ जुलाई को शिंजो आबे की हत्या हुई थी। इसके बाद परिवार ने बौद्ध परंपरा के अनुसार 15 जुलाई को उनका अंतिम संस्कार कर दिया था। आज जो स्टेट फ्यूनरल यानी राजकीय अंतिम संस्कार हुआ है वो सांकेतिक है। इसमें आबे की अस्थियों को श्रद्धांजलि के लिए रखा गया। आबे की अंतिम विदाई के लिए दुनियाभर के 217 देशों के प्रतिनिधि पहुंचे हैं। इस दौरान लोगों ने आबे से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को साझा किया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसके लिए जापान पहुंचे हैं। शिंजो आबे पीएम मोदी के अच्छे दोस्तों में से एक रहे हैं।

जापान में कैसे होता है अंतिम संस्कार?

जापान में ज्यादातर लोग बौद्ध परंपरा के अनुसार शवों का अंतिम संस्कार करते हैं। इस परंपरा के अनुसार, मरने के बाद परिजन मृतक के होंठों पर पानी लगाते हैं। जिसे अंतिम समय का जल कहा जाता है।

मौत के अगले दिन ‘वेक’ की परंपरा है, जिसमें जान-पहचान वाले लोग जुटते हैं। वह मृतक की बॉडी का आखिरी दर्शन करते हैं। इस दौरान उनसे जुड़ी यादों को साझा करते हैं। पुरुष काले सूट, सफेद शर्ट और काली टाई लगा कर आते हैं। वहीं, महिलाएं काले रंग के कपड़े पहन कर आती हैं। कई बार लोग मृतक के परिजनों को काले या सिल्वर रंग के लिफाफे में पैसे भी देते हैं। बौद्ध परंपरा के अनुसार मंत्र भी पढ़े जाते हैं।

इसके बाद हिंदू धर्म की तरह शवों को अग्नि के हवाले कर दिया जाता है। मतलब शव को जलाने से जुड़ी परंपरा है। इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के एक चेंबर में ताबूत को धीरे-धीरे खिसका दिया जाता है। इस दौरान परिजन वहां मौजूद रहते हैं। ताबूत के पूरी तरह से चेंबर में जाने के बाद परिजन वापस घर चले जाते हैं। दो से तीन घंटे बाद परिजनों को फिर से बुलाया जाता है और उन्हें मृतक के अवशेष दिए जाते हैं। परिजन चॉप स्टिक से हड्डियों को इकट्ठा करके कलश में रखते हैं। सबसे पहले पैर और फिर सिर की हड्डी कलश में रखी जाती है।

सनातन धर्म में अस्थियां विसर्जित होती हैं, तो जापान में उसे दफन किया जाता है

हिंदू परंपरा के अनुसार, मृतक की अस्थियों को नदियों में प्रवाहित कर दिया जाता है। वहीं, जापान में थोड़ा हटकर परंपरा है। वहां के लोग कलश में रखे अवशेष को पारिवारिक कब्र में दफन करते हैं। कई लोग सीधे अवशेष को दफन करने के लिए ले जाते हैं तो वहीं कई लोग कुछ दिन अपने घर पर रखते हैं। कई बार इनको अलग-अलग बांट भी दिया जाता है।

जापान में कलश में रखी अस्थियों को रखने की परंपरा भी है। इसके लिए कब्र के आकार की आलमारी बनती है। ये बहुमंजिला इमारतें भी होती हैं। 10 से 12 मंजिला इन इमारतों में कब्र के आकार की छोटी-छोटी आलमारी बनाई जाती हैं, जहां लोग अस्थि कलश रखते हैं। समय-समय पर यहां आकर परिजन श्रद्धांजलि भी देते हैं।

शिंजो आबे के साथ क्या हुआ था?

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की आठ जुलाई की सुबह गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमले के बाद आबे को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना के वक्त पूर्व पीएम शिंजो आबे नारा शहर में काउंसलर चुनाव के लिए भाषण दे रहे थे। यह रैली नारा शहर के यमातोसैदाईजी स्टेशन के पास आयोजित की गई थी।

इसी दौरान जापान नेवी के एक पूर्व ऑफिसर ने आबे को पीछे से गोली मारी। पूर्व पीएम को पीठ में गोली लगी। अस्पताल में तीन घंटे तक उनका इलाज चला, लेकिन उनकी जान नहीं बच पाई। आरोपी का नाम तेत्सुया यामागामी है। उसकी उम्र 41 साल है। वह नारा शहर का ही रहने वाला है।