JNU में छात्रसंघ अध्यक्ष और महिला शिक्षक का सिर फूटा, 26 छात्र घायल



नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) कैंपस में रविवार शाम को जमकर बवाल हुआ और मारपीट में छात्र संघ अध्यक्ष आइश घोष का सिर फट गया है। छात्र संघ का दावा है कि यह बवाल लेफ्ट और एबीवीपी के छात्रों के बीच हुआ है। इस हिंसा में दोनों छात्र संगठनों के करीब 25 छात्र घायल हुए हैं।

बताया जा रहा है कि विंटर सेमेस्टर रजिस्ट्रेशन के लिए पांच जनवरी आखिरी दिन था, इसलिए छात्र रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते थे। मगर लेफ्ट और छात्र संघ ने उनको रोकने की कोशिश की। इस दौरान छात्रों के दोनों गुट आपस में भिड़ गए। 

इसके बाद पेरियार हॉस्टल के सामने पत्थरबाजी शुरू हो गई। घटना के बाद कैंपस में पुलिस पहुंची है। घटना में कई छात्रों को गंभीर चोटें आई हैं। वहीं कई अन्य छात्रों को पुलिस अपने साथ ले गई है।

जेएनयू में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) की अध्यक्ष आइश घोष ने कहा, ‘मुझे मास्क पहने गुंडों ने बेरहमी से पीटा है। मेरा खून बह रहा है और मुझे बेहरमी से पीटा गया है। उन पर नकाब पहने लोगों ने हमला किया है।’
Jawaharlal Nehru University Student Union (JNUSU) President Aishe Ghosh at JNU: I have been brutally attacked by goons wearing masks. I have been bleeding. I was brutally beaten up.
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झड़प के दौरान की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। एक अन्य वीडियो में मास्क पहने छात्र हमला करते दिख रहे हैं। जेएनयू की शिक्षक सुचित्रा सेन को भी गंभीर चोटें आई हैं।


केंद्र सरकार ने मांगी रिपोर्ट

मानव संसाधन मंत्रालय ने पूरे मामले पर जेएनयू रजिस्ट्रार से रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि उन्होंने जेएनयू के वीसी के अलावा पुलिस अधिकारियों से भी बात की है ताकि शांति सुनिश्चित की जा सके। 

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइसी की हालत गंभीर

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में रविवार देर शाम छात्र गुटों में हुई मारपीट के बाद देर रात तक घायलों का एम्स और सफदरजंग अस्पताल पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। रात 10 बजे तक एम्स के ट्रामा सेंटर में 23 और सफदरजंग अस्पताल में 3 घायलों को भर्ती कराया है। जेएनयू छात्र संघ आइशी घोष की हालत गंभीर है। ट्रामा सेंटर में भर्ती आइसी घोष को सिर में कई टांके भी आए हैं। 

एम्स ट्रामा सेंटर के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि रात 10.30 बजे तक उनके यहां 23 छात्रों को गंभीर हालत में भर्ती कराया है। इनमें से करीब 12 छात्रों के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष की हालत गंभीर है।

केजरीवाल ने तुरंत हिंसा रोकने की अपील की

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तुरंत हिंसा रोकने की अपील की है। केजरीवाल ने कहा, ‘मैं जेएनयू में हिंसा से काफी हैरान हूं। छात्रों पर बुरी तरह से हमला किया गया है। पुलिस को तुरंत हिंसा रोककर शांति कायम रखनी चाहिए। अगर कैंपस के भीतर भी छात्र सुरक्षित नहीं हैं, तो देश कैसे तरक्की करेगा।’

दिल्ली सरकार ने कहा है कि जेएनयू कैंपस की स्थिति को देखते हुए सात एंबुलेंस भेजी गई हैं जबकि 10 एंबुलेंस स्टैंडबाय पर हैं। कैंपस में भारी सुरक्षा बल भी तैनात किया गया है। 

Delhi: Heavy police presence at the main gate of Jawaharlal Nehru University, following violence in the campus. https://t.co/RHjQxI3OKQpic.twitter.com/cmrPLG5pT9

— ANI (@ANI) January 5, 2020

एबीवीपी का दावा, हिंसा के पीछे लेफ्ट

इस बीच एबीवीपी ने ट्विटर पर बयान जारी कर कहा है कि कैंपस में हिंसा के पीछे लेफ्ट छात्रों का हाथ है। बयान के मुताबिक एसएफआई, आइसा और डीएसएफ छात्र संघ का हाथ इस हिंसा के पीछे है। इस हमले में करीब 25 छात्र घायल हुए हैं जबकि 11 छात्रों का पता नहीं है। एबीवीपी ने एक अन्य ट्वीट में दावा किया है कि छात्रों को हॉस्टल में घुसकर मारा गया और तोड़फोड़ की गई। 

:@ABVPVoice members have been brutally attacked by students affiliated to leftist student organizations SFI, AISA and DSF. Around 25 students have been seriously injured in this attack and there is no information as to the whereabouts of 11 students. pic.twitter.com/OZ1KPwcmdW

— ABVP Delhi (@ABVPDelhi) January 5, 2020

एबीवीपी की राष्ट्रीय महासचिव निधि त्रिपाठी ने कहा, ‘लेफ्ट के गुंडों की ओर से यह अघोषित आपातकाल है।’

भारत माता की जय बोल रहे थे हमलावर : जेएनयूएसयू 

एबीवीपी के बाद जेएनयू छात्र संघ ने भी ट्वीट करते हुए अपना पक्ष रखा है। जेएनयूएसयू ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘वे भारत माता की जय बोल रहे थे। कैंपस में छात्रों से मारपीट करने के बाद वे भारत माता का नाम ले रहे थे। जेएनयू कैंपस में सरकार द्वारा प्रायोजित आतंकवाद फैलाया जा रहा है।’

वहीं दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर अनिल बैजल ने कहा कि छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ जेएनयू में हुई हिंसा बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा के अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस को जेएनयू प्रसाशन के साथ हर संभव कदम उठाने चाहिए।    
 

योगेंद्र यादव से भी धक्का मुक्की 

सामाजिक कार्यकर्ता एवं जेएनयू के पूर्व छात्र योगेंद्र यादव को भी धक्का मुक्की से जूझना पड़ा। उन्होंने कहा कि पहले ऐसा कभी माहौल नहीं देखा। जेएनयू परिसर में प्रवेश करने से रोका गया और उनके साथ धक्का मुक्की भी हुई। यादव ने इसपर सवाल उठाते हुए कहा कि जेएनयू के अंदर घुसकर हंगामा करने वालों पर कार्रवाई करने की बजाय नेताओं को प्रवेश करने से रोका गया। 


जेएनयू छात्रों ने किया दिल्ली पुलिस के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन

 

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रों पर हमले के खिलाफ दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर छात्र विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। 

Delhi: Students protest outside Delhi Police headquarters against attack on students at Jawaharlal Nehru University pic.twitter.com/lt62dQIskb

— ANI (@ANI) January 5, 2020


जेएऩयू के 18 छात्रों को ट्रामा सेंटर लाया गया

 

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के 18 छात्रों को एम्स ट्रॉमा सेंटर में इलाज के लिए ले जाया गया है। इनमें से कई छात्रों के सिर पर गंभीर चोट है।

AIIMS Trauma Centre official: 18 people from Jawaharlal Nehru University (#JNU) have come to AIIMS Trauma Centre with complaints of bleeding in head, abrasions among others. Investigations are underway. #Delhi

— ANI (@ANI) January 5, 2020


जेएनयू मामले की जांच शालिनी सिंह करेंगी

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि गृहमंत्रालय ने जेएनयू मामले में जांच बैठा दी है। गृहमंत्रालय ने आदेश दिया था कि आईजी स्तर की पुलिस अधिकारी मामले की जांच करेगा। लिहाजा रविवार देर रात को जांच बैठा दी गई और पश्चिमी परिक्षेत्र की संयुक्त पुलिस आयुक्त शालिनी सिंह मामले की जांच करेंगी। माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस एक-दो दिन में गृहमंत्रालय को रिपोर्ट दे सकती है। 

जेएनयू हिंसा की मनोज तिवारी ने की निंदा

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने जेएनयू हिंसा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। जनादेश द्वारा ठुकरा दिए गए जनाधार विहीन राजनीतिक दलों और नेताओं की हताशा विश्वविद्यालयों में हिंसा के रूप में सामने आ रही है। 


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