कैंसर रिसर्च प्रोजेक्ट पर केन्द्र सरकार नहीं दे रही ध्‍यान-वैद्य डॉ. बालेन्दु प्रकाश

भोपाल। एक तरह के ब्लड कैंसर की एक आयुर्वेदिक दवा खोजने पर उत्तराखंड के वैद्य डॉ. बालेन्दु प्रकाश को भारत सरकार ने ‘पद्म् श्री’ पुरस्कार दिया। 1997 में 11 मरीजों पर पायलट स्टडी के बाद दवा कारगर मिली तो भारत सरकार ने इस दवा का यूएस-यूरोपियन पेटेंट भी करा लिया। लेकिन, दवा खोजे जाने के 20 साल बाद भी दवा बनाने के लिए केन्द्र सरकार ने पहल नहीं की। यह हाल तब है जब केन्द्र सरकार भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ाने की बात कह रही है।
भोपाल में आयुष विभाग व पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज द्वारा आयोजित कांफ्रेंस में भागे लेने आए वैद्य डॉ. बालेन्दु ने अपनी पीड़ा बताई। उन्होंने बताया कि एक्यूट प्रोमाइलोसिटिक ल्यूकेमिया (एपीएमएल) एक तरह का ब्लड कैंसर है।
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एक लाख में 13 लोगों का यह कैंसर होने की आशंका रहती है। एलौपैथी दवाओं से यह कैंसर ठीक तो हो जाता है, लेकिन दोबारा हो जाता है। उन्होंने 1997 के पहले इस कैंसर के कई मरीजों को इलाज किया था। लिहाजा, केन्द्र सरकार ने उन्हें रिसर्च प्रोजेक्ट सौंपा था। इस रिसर्च में सेेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद एंड सिद्धा भी शामिल हुआ था। इस खोज के लिए उन्हें 39 साल की उम्र में पद्म्ा श्री पुरस्कार दिया गया, वे यह पुरस्कार पाने वाले वे सबसे कम उम्र के थे।

ऐसे हुई पायलट स्टडी 
1997 में 11 मरीजों पर पायलट स्टडी की गई। ये वे मरीज थे, जिन्हें पैथौलॉजिकल जांचों से एपीएमएल की पुष्टि हो चुकी थी। इन मरीजों को 90 दिन तक डॉ. बालेन्दु द्वारा बनाई गई आयुर्वेदिक दवाएं दी गईं। डॉ. बालेन्दु के मुताबिक नतीजा यह रहा कि सभी मरीज ठीक हो गए। उन्हें दोबारा भी यह बीमारी नहीं हुई। इलाज के दौरान मरीजों के आहार में भी बदलाव किया गया, जिससे दवा का अच्छा असर हो। मरीजों के ठीक होने के बाद इस दवा पर भारत सरकार ने भी अपनी मुहर लगा दी। पेटेंट भी करा लिया, लेकिन आज तक दवा बनाने का काम शुरू नहीं किया। डॉ. बालेन्दु ने कहा अब दवा बनाना या बनवाना भारत सरकार का काम है, इसलिए उन्होंने भी दवा बनाना बंद कर दिया है।
तब: कहा था नई उम्मीद जगी है 
सीसीआरएएस के तत्कालीन डायेरक्टर डॉ. जीएस लव्हेकर ने रिसर्च प्रोजेक्ट पर कहा था कि इस दवा से ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए नई उम्मीद जगी है। आने वाली सालों में यह दवा एपीएमएल के मरीजों के लिए नए चिकत्सकीय साधन की तरह काम करेगी।
अब: जवाब ही नहीं दे रहे
डॉ.बालेन्दु ने बताया सरकार दवा बनाने में क्यो देरी कर रही है इसे लेकर तीन आरटीई प्रधानमंत्री कार्यालय व संबंधित विभागों में लगाई गई। वहां से यही जवाब मिला कि प्रकिया चल रही है।

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