घर-घर पैदा हो रहे रावण इतने राम कहां से लाऊं : डीजीपी

होशंगाबाद

।होशंगाबाद रेंज के जिलो में कानून व्यवस्था की समीक्षा करने आए डीजीपी ऋषि शुक्ला ने महिला अपराध पर नियंत्रण को लेकर अपनी लाचारी कवि दुष्यंत कुमार की इन पंक्तियों से जाहिर की कि त्रेता युग में तो दस सिर वाला एक ही रावण था पर आज घर-घर रावण हैं इतने राम कहा से लाऊं? रविवार को डीजीपी ने होशंगाबाद, बैतूल, रायसेन और हरदा जिले के एसपी, एएसपी, एसडीओ के साथ जिले वार समीक्षा की। समीक्षा में रेंज आईजी रवि गुप्ता भी मौजूद थे।

इस मौके पर मीडिया से औपचारिक चर्चा में डीजीपी ने बताया कि रेंज के जिलों में आगामी त्योहार सीजन, अपराधिक परिदृश्य, जनता की सुरक्षा जैसे मसले पर यह समीक्षा की जा रही है। उनका कहना है कि रेंज के चारों जिलों की अपनी-अपनी अलग-गलग प्रवृत्ति है इसलिए एक ही फार्मूला चारों जिलो पर लागू नही हो सकता है इसलिए कस्टमाइज पुलिसिंग पर फोकस किया जा रहा है। उनका कहना है कि महिला अपराध और साइबर क्राइम अब बडी चुनौती है।
पुलिस बल की कमी को लेकर उनका कहना था कि धीरे-धीरे स्थिति सुधर रही । बढते साइबर क्राइम को देखते हुए डीजीपी का कहना था कि हर थाने में एक-एक सब इंस्पेक्टर ऐसा नियुक्त किया गया है जो साइबर क्राइम को लेकर कार्रवाई कर सकता है। वही पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर उनका कहना है कि ऐसे मामलो में शिकायत मिलने पर विभागीय जांच करवाकर जो मेन्युअल में सजा है वह दी जाती है।
बढती सड़क दुर्घटना और ब्लैक स्पाट को लेकर डीजीपी का कहना था कि प्रदेश में 20 फीसदी अपराध सड़क दुर्घटना के ही होते है। जितने मामले हत्या में मौत के नही होते, उससे ज्यादा मामले सड़क हादसे में मौत के होते हैं। इसे बीस फीसदी से पांच फीसदी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस के निचले अमले के साथ आंतरिक संवाद के लिए डीजी डेस्क बनाने की भी जानकारी दी। इससे के माध्यम से आरक्षक-प्रधानआरक्षक आदि अपनी बात सीधे उन तक पहुंचा सकते हैं।
जांच के बाद रोक सकते हैं वेतनवृद्घि
पुलिस रेग्युलेसन एक्ट में आरक्षक और प्रधानआरक्षक स्तर के कर्मचारियो को अल्पवेतन कर्मचारी माना गया है इसके अनुसार पुलिसकर्मियो को कोई भी वेतनवृद्धि रोकने जैसी सजा नहीं दी जा सकती है और इसको लेकर समय-समय पर पीएचक्यू से परवाने भी जारी होते हैं। इसके बाद भी जिलो में ऐसी सजा दी जाती है। इस संबंध में जब डीजीपी से पूछा गया तो उनका कहना था कि अनुशासन बनाएं रखने के लिए सजा दी जाना जरूरी है । यदि विभाग जांच में दोष सिद्घ पाया गया तो एक वेतनवृद्धि रोका जा सकती है।

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