ऐसे में कैसे लागू होगा एक व्यक्ति एक पद का फार्मूला

पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश अध्यक्ष ही दो-दो पदों परः इंदौर में मालिनी गौड़ महापौर के साथ विधायक भी 

कटनी। एक व्यक्ति एक पद का फार्मूला इस समय भारतीय जनता पार्टी में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रदेश से लेकर स्थानीय स्तर पर संगठन के भीतर सुगबुगाहट है कि कोई कार्यकर्ता यदि दो पदों पर आसीन है तो उसे एक पद की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर दो पदों पर बैठे नेताओं की छानबीन भी शुरू हो चुकी है, लेकिन सवाल यह है कि भाजपा एक व्यक्ति एक पद के फार्मूले को कैसे अमल में लायेगी जबकि उसके राष्ट्रीय और प्रदेश अध्यक्ष दो-दो पदों पर विराजमान है। अमित शाह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ-साथ हाल ही में गुजरात से राज्यसभा सांसद चुने जा चुके हैं जबकि नंदकुमार चौहान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष होने के साथ-साथ खंडवा से सांसद भी हैं।
ऊपर स्तर पर जब बड़े नेता इस फार्मूले पर फिट नहीं बैठते तब पार्टी निचले स्तर पर इसे लागू करना किसी चुनौती से कम नहीं। वैसे सत्ता के साथ संगठन का कोई पद लाभ का नहीं माना जाता। पार्टी आमतौर पर अपने हर कार्यकर्ता को कहीं न कहीं एडजस्ट करने इसे लागू करने की बात करती है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में घोषित हुई भाजपा की जिला और मोर्चों की कार्यकारिणियों में कुछ ऐसे लोगों को मौका मिल गया है जो दो-दो पदों पर आसीन है। संगठन के जिम्मेदार लोग भले ही जरूरत और सक्रियता के हिसाब से इनकी नियुक्ति की बातें कर रहें हों लेकिन जिन कार्यकर्ताओं को कहीं अवसर नहीं मिल पाया उन्हें जिम्मेदारों की यह बात गले नहीं उतर रही। उनका कहना है कि पार्टी में बड़ी संख्या में योग्य कार्यकर्ता हैं ऐसे में किसी भी कार्यकर्ता को दो-दो पद से नवाजना उचित नहीं। असंतुष्टों ने अपनी इस बात से प्रदेश नेतृत्व को भी अवगत कराया गया है। उधर पिछले दिनों कटनी आए संगठन प्रभारी विनोद मिश्रा भी पार्टी के भीतर एक व्यक्ति एक पद की वकालत कर चुके हैं। उनका साफ कहना था कि हर कार्यकर्ता को काम पर लगाया जाए। शिकवा शिकायतों के बाद ही ऐसे कार्यकर्ताओं को चिन्हित किया जा रहा है जो दो-दो पदों पर आसीन हैं। जिला संगठन और मोर्चों की मौजूदा कार्यकारिणियों से नाखुश लोगों का सोचना है कि यदि एक व्यक्ति एक पद का फार्मूला निचले स्तर तक कड़ाई से लागू हो गया तो उन्हें मौका मिल सकता है। इसीलिए यह मुहिम फिलहाल तेज कर दी गई है। खबर हैं कि उपर से मिले निर्देशों के आधार पर पदों में आसीन लोगों की पूरी जानकारी ऊपर भेजी जा रही है। हालांंकि दो पदों की जिम्मेदारी सम्हालने वाले खुलकर तो कुछ नही बोल रहे पर वे अपनी ही पार्टी में कई स्तरों पर इस कार्य व्यवस्था का हवाला भी दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इंदौर की महापौर श्रीमती मालिनी गौड़ वर्तमान में महापौर के साथ विधायक पद की जिम्मेदारी भी सम्हाल रहीं हैं। और तो और पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश अध्यक्ष समेत कई नेता दो-दो पदों पर आसीन है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर पार्टी पूरी पारदर्शिता के साथ इस फार्मूले को कैसे लागू कर पाएगी। पार्टी के भीतर कोई भी नेता या कार्यकर्ता नियमों से बड़ा नहीं है, ऐसे में टॉप टू बॉटम यदि इसे लागू किया गया तो बड़े पैमाने पर संगठनात्मक सर्जरी करनी पड़ेगी।

नया नही यह फार्मूला 

राजनैतिक दलों में एक व्यक्ति एक पद का फार्मूला नया नहीं है। कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस में एक व्यक्ति एक पद के फार्मूले की बातें सामने आती रहतीं हैं लेकिन किसी भी राजनैतिक दल में कड़ाई से इसका पालन नहीं हो पाया। भाजपा चूंकि देश और प्रदेश की सत्ता में है और कार्यकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है ऐसे में भाजपा के भीतर सभी को संतुष्ट करने की योजना के मुताबिक एक व्यक्ति एक पद का फार्मूला  पुनः लाया जा रहा है। अब देखना है कि इस पर कितना अमल हो पाता है क्योंकि वर्तमान स्थिति में जिले में ही अनेक चर्चित और बड़े नाम ऐसे हैं जो दो-दो पदों की जिम्मेदारियां  देख रहे हैं। उन्हें एक पद से मुक्त करना या उनसे इस्तीफे लेना किसी चुनौती से कम नहीं।  

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