7 सितंबर से पितृपक्ष, भूल कर भी न करें ये काम

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व होता है. 7 सितंबर को पितृपक्ष यानि श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहे हैं. पितृपक्ष में पितृगणों का श्राद्ध करके पितरो को खुश किया जाता है. इस बार 14 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष में पितरो को खुश करने से घर में सुख, शांति और धन की कभी कमी नहीं होती है. वैसे पितृपक्ष 15 दिन के होते हैं. साथ ही ध्यान रहे है कि पितृपक्ष में ऐसी चीजें भूलकर भी नहीं करें, जिससे हमारे पूर्वजों का अनादर हो.
अपने घर के आसपास कभी भी जानवर या पक्षियों को नहीं मारना या भगाना चाहिए. मान्यता है कि हमारे पूर्वज किसी न किसी रुप में हमारे घर में आशिर्वाद देने आते हैं. अगर हम उनका अनादर करेंगे तो वो बिना आशिर्वाद के चले जाएंगे. पितरों को खुश करने से पितृदोष नहीं लगता. ध्यान रहे पितृपक्ष के दौरान जानवरों या पक्षियों घर से न भगाएं. 

मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए. ये दिन हमारे पूर्वजों को याद करने के लिए होते हैं, उनका श्राद्ध करने लिए होते हैं. अपने घर न कोई शुभ कार्य करें और न ही नया सामान लाएं. ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं होती, वो अपने घर में नई कार या नया सामान की खरीद लेते हैं. आप ये काम न करें, पितृपक्ष के बाद ही शुभ कार्य करें.

हो सके तो आप पितृपक्ष के दौरान घर की छत पर पानी का कटोरा और अन्न के दाने डाल देना चाहिए. इससे पक्षियों का खाना-पानी दोनों मिल सके. श्राद्ध पक्ष में किसी न किसी रुप में पूर्वज आपके घर आते हैं. आप ये केवल पितृपक्ष में ही न करें, ये आप हर रोज कर सकते हैं. जानवर या पंक्षियों को दाना-पानी देने से मन में एक अलग से शांति मिलेगी. धीरे-धीरे यही शांति पूरे घर में फैल जाएगी.

श्राद्ध पक्ष में काले तिल को छोड़कर किसी दूसरे तिल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. पितरों को तृपण करने के काले तिल का विशेष महत्व होता है. श्राद्ध पक्ष में ब्राहम्ण को भोजन करवाने का विशेष महत्व होता है.
श्राद्ध पक्ष में कुछ चीजों का खाना भी वर्जित माना जाता है, जैसे काला नमक, जीरा, खीरा, लौकी, सरसों साग आदि ये सब न खाएं. मांसहार का सेवन तो आप बिल्कुल न करें. इससे आपके व्यवसाय या नौकरी में नुकसान हो सकता है.

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