मिशन 2018: बनने लगे बायोडाटाः ली जा रही टोह

कटनी। जिले में चुनावी बयार बहने में अभी करीब एक वर्ष का वक्त जरूर है, लेकिन राजनीतिक सरगर्मियां पूरे शबाब पर पहुंच चुकी हैं। सत्ता पक्ष भाजपा में कटनी की चारों सीटों पर सरगर्मिंयों की यह बानगी अचानक सक्रिय हुए दावेदारों को देखकर महसूस की जा सकती हैं। उधर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के नेता फिलहाल किंकर्तव्यविमूढ़ से नजर आ रहे हैं हालांकि एंटी इन्कंबेंसी के लिहाज से कांग्रेस पार्टी आश्वस्त तो नजर आ रही है,लेकिन सरकार के खिलाफ जनता का क्या रूख है इसे लेकर फिलहाल का परिदृश्य भाजपा के पक्ष में ही नजर आ रहा है।
संपर्कों का दौर, बायोडाटा की फीडिंग
भारतीय जनता पार्टी की जिले में अच्छी स्थिति को देखते हुए जिले की चारों सीटों पर उसके दावेदारों की लम्बी फेहरीस्त न सिर्फ लोगों से संपर्क में जुटी है, बल्कि कंम्यूटरों में बायोडाटा की फीडिंग का काम भी तेजी से चल रहा है। पार्टी में कटनी मुड़वारा विधानसभा के लिए अभी से दावेदारों के मन में लड्डू फूट रहे हैं। विधायक संदीप जायसवाल अपनी टिकट की रिपीट को लेकर आश्वस्त हैं, तो कटनी में भाजपा के पिछले रिकार्ड के मद्देनजर कुछ दावेदार रिपीट पर भाजपा के नुकसान को बताने की जी तोड़ मेहनत में जुटे दिख रहे हैं। भाजपा गलियारों में कटनी मुड़वारा विधानसभा से वर्तमान विधायक संदीप जायसवाल प्रमुख दावेदार तो हैं ही लेकिन उनकी इस दावेदारी को महापौर शशांक श्रीवास्तव कड़ी टक्कर देंगे इसकी चर्चा भी खुलेआम सुनी जा सकती है। इसी प्रकार संघ के समर्थन की उम्मीद लगाये पूर्व विधायक राजू पोद्दार भी अपनी तैयारी की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। जबकि पूर्व विधायक अलका जैन और सुकीर्ति जैन भी अपने समर्थकों से टोह लेनी शुरू कर दी है। यहीं नहीं पूर्व विधायक सुनील मिश्रा भी अपनी संभावनाएं तलाशते नजर आ रहे हैं। भाजपा के कई और वरिष्ठ पदाधिकारी कहीं न कहीं स्वयं को विधायक पद का दावेदार मानने के लिए मन ही मन प्लान बनाने में जुट गये हैं।
कांग्रेस में भी उत्साह
भाजपा के बाद प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस में भी टिकट को लेकर तैयारियों का दौर चलने लगा है। पूर्व विधायक चंद्रदर्शन गौर, चीनी चेलानी के साथ पूर्व महापौर विजेन्द्र मिश्र अपने अपने समर्थकों के साथ संगठन में सक्रिय हैं। वहीं नेता प्रतिपक्ष मिथलेश जैन ने भी कांग्रेस के एक बड़े धड़े के साथ संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दीं हैं। इन नामों के साथ ठाकुर गुमान सिंह तथा विजय पटैल भी स्वयं को प्रमुख दावेदार मान रहे हैं। महिलाओं में शहर महिला कांग्रेस अध्यक्ष रजनी सोनी का नाम भी दावेदारों की सूची में कांग्रेस के अंदर सुना जा सकता है।
क्या हो सकते हैं समीकरण
बात सिर्फ कटनी मुड़वारा की हो तो यहां विधायकी का सपना सजाना सभी दलों के लिए आसान जरूर है किन्तु जनता के फैसले के आगे इसमें फिलहाज भाजपा ही फायदे में नजर आ रही है। पिछले तीन चुनावों पर नजर डालें तो भाजपा का जनाधार बढ़ता ही दिख रहा है। अलका जैन की विजय के बाद राजू पोद्दार की 30 हजारी जीत और फिर संदीप जायसवाल 48 हजार वोट से जीते थे। इस लिहाज से कटनी मुड़वारा भाजपा का गढ़ बन गया है। लोगों का कहना है कि वोटों के प्रतिशत में कितनी भी कमी की जाए फिर भी भाजपा चुनाव जीत सकती है। उधर कांग्रेस ने सरकार के कामकाज पर जनता के रूख तथा मंहगाई के कारण परेशान जनता के समर्थन की आस लगाई है। वैसे कटनी के इतिहास पर गौर करें तो कांंग्रेस की यह उम्मीद बेमानी भी नहीं क्योंकि यह कटनी शहर की वही जनता है जिसने किन्नर को महापौर बना कर राजनीतिक दलों को पहले ही करारा तमाचा जड़ दिया था।

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