बैंक से 40 हजार रूपए लेकर भागा युवक

कटनी/उमरियापान। उमरियापान की एसबीआई बैंक शाखा में मंगलवार की दोपहर 2 बजे बड़ा कछारगांव निवासी 55 वर्षीय रामनारायण बागरी 8 हजार रूपये जमा करने पहुंचा था लेकिन बुजुर्ग की मदद करने वाले वर्दीधारी युवक ने पैसे तो जमा किए साथ ही बुजुर्ग के 40 हजार रूपये निकालकर रफू चक्कर हो गया। उमरियापान के शासकीय स्वास्थ्य केन्द्र में मलेरिया इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ 55 वर्षीय रामनारायण बागरी ने बताया की एसबीआई बैंक में दोपहर को 8 हजार रूपए जमा करने गया था लेकिन अधिक भीड होने पर कैशियर ने काउंटर में रखी स्वाइप मशीन से एटीएम कार्ड स्क्रेप करके पैसे जमा करने की सलाह दी लेकिन बुजुर्ग से मशीन से पैसे जमा करते नहीं बन रहा था तो, बाजू में खडे वर्दीधारी युवक ने मदद करने को कहा, बुजुर्ग ने पुलिस समझकर अपना एटीएम कार्ड वर्दीधारी युवक को दे दिया। युवक ने 8 हजार रूपये जमा तो कर दिया लेकिन बुजुर्ग के 40 हजार रूपये निकालकर फरार हो गया। 15 मिनिट बाद ठगी का शिकार हुए बुजुर्ग के मोबाईल में 8 हजार रूपये जमा और 40 हजार रूपये निकलने का एसएमएस आते ही बुजुर्ग ने बैंक के अंदर और बाहर शोर मचाकर दौड़ लगाकर वर्दीधारी युवक को काफी तलाश किया लेकिन युवक का पता नहीं चला।डीआईजी के पहुंचने से पहले हरकत में आया पुलिस अमला
ठगी का शिकार हुए रामनारायण बागरी ने पहले बैंक में फिर थाने में घटना की सूचना दी तो स्लीमनाबाद एसडीओपी रेंज का पूरा पुलिस अमला हरकत में आ गया, क्योंकि डीआईजी भगवत सिंह चौहान उमरियापान थाना आने वाले थे। ठगी का शिकार हुए बुजुर्ग ने थाना प्रभारी नितिन कमल को बताया की आरोपी युवक बर्दी में, तत्काल थाना प्रभारी ने घटना की सूचना एसडीओपी कमला जोशी को देते ही स्लीमनाबाद पुलिस तिराहा में अलर्ट हो गई। इसी दौरान एक युवक वर्दी में चला आ रहा था जिसे डायल 100 वाहन में तैनात रहे आरक्षक मनीष कुमार सैया ने और ड्राईवार दीपक चौरसिया ने रोककर पूछताछ की तो युवक के गोलमाल जवाब देते ही आरक्षक ने गाडी में बैठाकर थाने ले जाने लगा। आरोपी युवक अपने आपको फंसता देख चलती गाडी से कूदकर भाग गया और स्लीमनाबाद की बस्ती में 3 किमी तक आरक्षक और ड्राईवर को छकाया रहा। आखिरकार आरक्षक मनीष कुमार ने और ड्राईवर दीपक चौरसिया ने देशी शराब दुकान के पास से गिरफ्तार करके उमरियापान थाने लाई। बताया जाता है आरोपी युवक सतना जिले के अमरपाटन का जय प्रकाश है, जो 2006 में एसएएफ जबलपुर की 6वीं बटालियन में था, जिसे किसी लापरवाही के कारण बर्खास्त कर दिया गया था। पत्रकारों ने थाने पहुंचकर थाना प्रभारी नितिन कमल से घटना और आरोपी की जानकारी मांगी तो देने से साफ इनकार कर दिया साथ ही अखबारों में खबर प्रकाशित न करने और सोशल मीडिया में भी खबर पोस्ट करने से मना कर दिया था।

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