शूर्पणखा ने भद्रा में बाँधी थी रावण को राखी तो हो गया था विनाश

धर्म डेस्क। 12 साल बाद ऐसा संयोग बना है जब राखी के दिन ग्रहण लगेगा इसलिए इस बार राखी के दिन सूतक भी रहेगा। पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ 6 अगस्त 2017 को रात्रि 10:28 बजे से आरंभ होगा परन्तु भद्रा काल व्याप्त रहेगी।


भद्रा में न बांधे राखी
पंडितों ने बताया की शूर्पणखा ने अपने भाई रावण को भद्रा में राखी बांधी थी, जिसके कारण रावण का विनाश हो गया, यानी कि रावण का अहित हुआ। इस कारण भद्रा में राखी नहीं बांधनी चाहिए।

भद्रायां द्वे न कर्त्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी।

अतः हिन्दू शास्त्र के अनुसार यह त्यौहार 7 अगस्त को भद्रा रहित काल में मनाया जाएगा। यदि किसी कारणवश भद्रा काल में यह कार्य करना हो तो भद्रा मुख को छोड़कर भद्रा पुच्छ काल में रक्षा बंधन का त्यौहार मानना श्रेष्ठ है।

भद्रा पूंछ – 06:40 से 07:55 
भद्रा मुख – 07:55 से 10:01 
भद्रा अन्त समय – 11:04

रक्षासूत्र तभी प्रभावशाली बनता है जब उसे मंत्रों के साथ बांधा जाए। राखी बांधने का मंत्र- येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे! मा चल! मा चल!!’

इस मंत्र का अर्थ है कि जिस प्रकार राजा बलि ने रक्षासूत्र से बंधकर विचलित हुए बिना अपना सब कुछ दान कर दिया। उसी प्रकार हे रक्षा! आज मैं तुम्हें बांधता हूं, तू भी अपने उद्देश्य से विचलित न हो और दृढ़ बना रहे।

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