जानिये क्या है नागपंचमी का महत्व, क्यों न करें ये काम

धर्म डेस्क। गुरुवार को नाग पंचमी मनाई जाएगी। श्रावण माह की शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।  पंचमी तिथि के देवता नाग ही हैं। भगवान शिव को सांपों का देवता माना जाता है। इसल‌िए इस द‌िन भूलकर भी नाग देवता का अपमान न करें। कही भी सांप द‌िखे तो उसे दूध प‌िलाएं। कहा जाता है क‌ि अगर इस द‌िन सापों का अपमान क‌िया तो हमेशा ही सांपों से खतरा बना रहा है।  नाग पंचमी पर ऊं नम: शिवाय और महामृत्युंजय मंत्रों का सुबह-शाम जाप करना चाहिए। आचर्यों  के अनुसार 27 जुलाई को प्रात: 7 बजकर 5 मिनट तक भद्रा है। शुभ मुहूर्त को भद्रा में त्याग देना चाहिए। इस दिन भूलोक की भद्रा है। 
भारतीय संस्कृति में शिव के गले में सर्प और विष्णु को शेषनाग पर शयन करते हुए दिखाया गया है, जो प्रतीकात्मक रुप से सर्प और नाग के महत्व को उजागर करता है. अमृत सहित नवरत्नों की प्राप्ति के लिए देव-दानवों द्वारा किए गए समुद्र-मंथन की कथा के अनुसार जगत-कल्याण के लिए वासुकी नाग ने मथानी के रस्सी के रुप में कार्य किया था.

श्रीमद्भागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं ‘मैं नागों में अनंत (शेषनाग) हूं’. पुराणों में वर्णित है कि धरती शेषनाग के फणों के ऊपर टिकी हुई है.

पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार इस दिन नाग जाति की उत्पत्ति हुई थी. महाभारत की एक कथा के अनुसार जब महाराजा परीक्षित को उनका पुत्र जनमेजय तक्षक नाग के काटने से नहीं बचा सका तो जनमेजय ने विशाल सर्पयज्ञ कर यज्ञाग्नि में भस्म होने के लिए तक्षक को आने पर विवश कर दिया.

तब आस्तिक मुनि के आग्रह और तक्षक के क्षमा मांगने उसे क्षमा कर दिया. उन्होंने वचन दिया कि श्रावण मास की पंचमी को जो व्यक्ति सर्प और नाग की पूजा करेगा, उसे सर्प व नाग दोष से मुक्ति मिलेगी.

वर्तमान में कितना प्रासंगिक है नागपंचमी पर्व
हिन्दू संस्कृति केवल प्राणिमात्र नहीं बल्कि जड़-चेतन, चल-अचल को ईश्वर के रुप में देखता है. प्राचीन काल से पर्वों और उत्सवों को धर्म से जोड़ा गया है. यह यदि प्रत्यक्ष रुप से धार्मिक आस्था में वृद्धि करता है, तो अप्रत्यक्ष रुप से व्यक्ति और समाज को पर्यावरण से जोड़ता है.

यह संदर्भ सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि मनाए जाने वाले नागपंचमी के लिए और भी ज्यादा प्रासंगिक है. क्योंकि देखा जाए तो वर्तमान समय में सर्पों और नागों को बचाना ज्यादा तर्कसंगत है. कई व्याधियों और रोगों के लिए आज मेडिकल साइंस बहुत हद तक दवाईयों के निर्माण के लिये सांपों और नागों से प्राप्त होने वाले विष पर निर्भर है. इनके जहर की थोड़ी-सी मात्रा अनेक लोगों का जीवन बचानें में उपयोगी है.

भारत आज भी एक कृषि-प्रधान देश है. परंपरागत रुप से यहां वर्षा ऋतु में धान की फसल तैयार की जाती है. इन धान के पौधों को चूहे काट कर नष्ट कर देते है. ये चूहे किसान के शत्रु हैं और चूहों के शत्रु हैं सर्प. सर्प और नाग चूहों भक्षण कर एक संतुलन उत्पन्न करते हैं. सर्पों और नागों की इस पारिस्थितिकीय उपयोगिता के कारण ही प्राचीन काल से नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है.

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