प्रॉपर्टी पर GST: मकान खरीदने से पहले जरूर जान लीजिए ये 7 बातें

नई दिल्ली। आजादी के बाद अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार माना जाने वाला गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) मौजूदा जटिल और अस्पष्ट कर ढांचे को खत्म कर सकता है। सरकार, डेवलपर्स और उपभोक्ताओं के बीच अंतर को कम करने के लिए मैजिकब्रिक्स ने हाल ही में नई दिल्ली में रियल एस्टेट-रेरा और जीएसटी युग नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। एक एकल अप्रत्यक्ष कर-संरचना व्यवस्था वाले इस कदम से पूरे भारत में कर संग्रह के और सहज होने की उम्मीद है।
जीएसटी काउंसिल ने अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के लिए 18 फीसद जीएसटी की दर तय की है जिसमें भूमि की लागत को छोड़कर अचल संपत्ति क्षेत्र के लिए पूर्ण इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) शामिल है। हम आपको प्रॉपर्टी सेक्टर के ऊपर जीएसटी के अंतर्गत लगाए गए तमाम नियमों को विस्तार से बताने जा रहे हैं…
रियल एस्टेट सेक्टर पर लगेगा 18 फीसद का टैक्स – 
सरकार से संशोधित आदेश के तहत अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर 18 फीसद की दर से जीएसटी लगेगा जिसमें 9 फीसद का स्टेट जीएसटी (एसजीएसटी) और 9 फीसद सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी) लगेगा। सरकार ने डेवलपर की ओर से चार्ज की गई कुल राशि के एक तिहाई के बराबर भूमि मूल्य की कटौती की अनुमति भी दी है इस हिसाब से प्रभावी दर 12 फीसद हो जाती है।
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज जीएसटी के दायरे से बाहर हैं – 
स्टांप ड्यूटी (स्टाम्प शुल्क) और रजिस्ट्रेशन चार्ज (पंजीकरण शुल्क) जीएसटी के दायरे से बाहर हैं क्योंकि ये कर स्टेट की ओर से वसूले जाने वाले कर हैं और प्रॉपर्टी टैक्स भी एक म्युसिपल लेवी (नगरपालिका की ओर से वसूला जाने वाला कर) है।
इस साल नहीं भरना होगा डिटेल्ड रिटर्न – 
केपीएमजी पार्टनर (अप्रत्यक्ष कर) के प्रियाजित घोष ने बताया नया कानून अनुपालन के मोर्चे पर एक चुनौती था और इसीलिए सरकार ने इसको लेकर शुरुआती कुछ महीनों में उदार रुख अपनाने का फैसला किया है। सरकार ने कहा है कि व्यापारियों/ व्यापारियों को फिलहाल डिटेल्ड रिटर्न भरने की जरूरत नहीं होगी, इस बार समरी रिटर्न भरने भर से भी उनका काम चल जाएगा।
शुरुआती मुद्दे अनिवार्य – 
गुलशन होम्स के दीपक कपूर ने कहा कि पिछले कर शासन में दरों (कर दरों) की बहुलता ने बहुत भ्रम पैदा कर दिया था। हाइन्स इंडिया के डॉयरेक्टर (फाइनेंस) टीना रॉक्यान ने बताया, “शुरुआती मुद्दे, मुद्रास्फीति के दबाव और कुछ अल्पावधि प्रतिकूल प्रभाव पहले 12-15 महीनों में अनुपालन को मुश्किल बनाते हैं, लेकिन वैश्विक लिहाज से जीएसटी लाभकारी रहा है।”
कराधान संबंधी मुद्दों का आसान निवारण – 
जीएसटी के बाद, कुछ कर मुद्दों को निपटाना आसान हो जाएगा क्योंकि सेवाओं और सामानों पर लेवी के संबंध में इसमें केंद्र और राज्यों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर किसी भी तरह के असमंजस की स्थिति नहीं होगी। केपीएमजी पार्टनर (अप्रत्यक्ष कर) के प्रियाजित घोष ने बताया, “कराधान के मुद्दों का निवारण करना बहुत आसान होगा क्योंकि नए शासन में एक ही नियम सभी के लिए लागू होंगे।”
ट्रांजिशन पीरियड डेवलपर्स और उपभोक्ताओं के लिए बड़ा सिरदर्द – 
गुलशन होम्स के दीपक कपूर ने बताया कि ट्रांजिशन पीरियड में अचल संपत्ति लेनदेन करने से आईटीसी की गणना कैसे की जाएगी, इस पर फिलहाल अस्पष्टता है, जबकि नया कानून अमल में आ चुका है। उन्होंने कहा, “जुलाई 1, 2017 के बाद, यदि एक इकाई के लिए एक चालान तैयार किया जाना है, तो इसकी गणना कैसे होगी? यदि कोई ग्राहक 1 जुलाई को एक अचल संपत्ति उत्पाद खरीदना चाहता है, तो मुझे उसे क्या कहना चाहिए? क्या मैं उसे ये बताऊं कि मैं आपको अपनी अचल संपत्ति बेच रहा हूं, लेकिन वास्तविक कीमत 3 से 6 महीनों के बाद दिखाई जाएगी, जब मैं अपना आईटीसी विवरण प्राप्त कर लूंगा।”
गैर-पंजीकृत विक्रेता बनेंगे सिरदर्द – 
अतीत के विपरीत, पंजीकृत व्यापारी होने की सूरत में करों का भुगतान करने की देनदारी वस्तुओं और सेवाओं के प्रदाता से रिसीवर तक स्थानांतरित कर दी गई है। वहीं अगर किसी गैर पंजीकृत व्यापारी से सामान की खरीद की जाती है तो सामान प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर रिवर्स चार्ज की देनदारी बनेगी जो कि खरीदार की अनुपालन लागत में जुड़ेगा। अब जीएसटी के बाद लोग किसी भी गैर पंजीकृत व्यापारी से खरीद करने से बचेंगे।

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